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________________ आगम (१८) “जम्बूद्वीप-प्रज्ञप्ति” – उपांगसूत्र-७ (मूलं+वृत्ति:) वक्षस्कार [३], ---------------------- ------ मूलं [१६] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[१८]उपांगसूत्र-[७] "जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति" मूलं एवं शांतिचन्द्र विहिता वृत्ति: zeeaseen993 प्रत श्रीजम्मूद्वीपशान्तिचन्द्रीया कृत्तिः ॥२३१॥ |३वक्षस्कारे आपातचिलातयुद्ध म.५६ सूत्रांक [१६]] दीप तेणं कालेणं तेणं समएणं उत्तरभरहे वासे बहवे आवाहाणाम चिलाया परिवसंति अड्डा दित्ता वित्ता विच्छिण्णविउलभवणसंयणासणजाणवाहणाइन्ना बहुधणबहुजायस्वरयया आओगपओगसंपउत्ता विच्छडिअपउरभत्तपाणा बहुदासीदासगोमहिसगवेलगपभूआ बहुजणस्स अपरिभूआ सूरा वीरा विकता विच्छिण्णविउलबलवाहणा बहुसु समरसंपराएसु उद्धलक्खा यावि होत्था, तए णं तेसिमाबाडचिलायाण अण्णया कयाई विसयसि बहूई उप्पाइअसयाई पाउन्भवित्या, तंजहा-अकाले गजिअं अकाले विज्जुआ अकाले पायवा पुष्प॑ति अमिक्खणं २ आगासे देवयाओ णचंति, दए गं ते आवादचिलाया विसबसि बहूई उप्पाइमसयाई पाउब्भूयाई पासंति पासित्ता अण्णमणं सदाति २ ता एवं बवासी-एवं खलु देवाणुप्पिा! अम्हं विससि बहूई उप्पाइअसयाई पाउन्भूआई तंजहा-अकाले गनिमे अकाले विजुआ अकाले पायथा पुष्फति अमिक्खणं २ आगासे देवयाओ णचंति, तंण णजइ णं देवागुप्पिा ! अम्ह विसयस के मन्ने उबदवे भविस्सईत्तिक? ओहयमणसंकप्पा चिंतासोगसागर पविट्ठा करपल पल्हत्थमुद्दा अट्टरमाणोवगया भूमिगयदि डिआ झिआयंति, तए णं से भरहे राया चकरयणदेसिअमग्गे जाव समुहरवभूअं पिव करेमाणे २ तिमिसगुहाओ उत्तरिक्षणं दारेणं णीति ससिब मेहंधयारणिवहा, तए णं ते आवाडचिलाया भरहरस रणो अग्गाणी एजमाणं पासंति २चा आसुरुत्ता रहा चंडिकिया कुविआ मिसिमिसेमाणा अण्णमण्णं सदाति २ सा एवं क्यासी-एस णं देवाणुप्पिा! केह अप्पत्थिअपत्थए दुरंतपंतलक्खणे हीणपुण्णचाउसे हिरिसिरिपरिवजिए जे णं अम्हं विसयस उरि विरिएणं इषमागकछद तं तहा णं पत्तामो देवाणुप्पिा ! जहा गं एस अम्हं बिसयस उवरिं चिरिएणं णो हब्वमागच्छइत्तिकटू अण्णमण्मस्स अंतिए एअमठु पडिसुति २चा सण्णबद्धवम्मियकवा उप्पीलिअसरासणपट्टिा पिणद्धगेविज्जा बद्धआविबीमलवरचिंधपट्टा Desed beeseaeeeeeeeserved अनुक्रम [८०] 10 ॥२३॥ JimilennitinAL jimmitrina ~117~
SR No.035024
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 24 Jambudwippragyapti Mool evam Vrutti Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages426
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_jambudwipapragnapti
File Size104 MB
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