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________________ आगम (१६) "सूर्यप्रज्ञप्ति” – उपांगसूत्र-५ (मूलं+वृत्ति:) प्राभृत [१८], -------------------- प्राभृतप्राभृत [-], -------------------- मूलं [८९-९३] + गाथा पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र- [१६] उपांगसूत्र- [१] "सूर्यप्रज्ञप्ति मूलं एवं मलयगिरि-प्रणीता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [८९-९३] अबाधा अ गाथा सूर्यप्रज्ञ- चंदे' इति एगे पुण एवमासु ता बारस जोयणसहस्साई सूरे उहुं उच्चत्तेणं अद्धतरसमाई चंदे एगे पुण एवमाईसु री मिवृत्तिः||१२, 'तेरस सूरे अद्धचउपसमाई चंदे' इति, एगे पुण एवमाहूंसु ता तेरस जोयणसहस्साई सूरे उहं उच्चत्तेणं अद्ध-[2] (मल चोहसमाई चंदे पगे एवमासु १३, 'चोइस सूरे अपंचदसमाई चंदे' इति एगे पुण एवमाइंस वा चोदस जोय- Iचत्वं तारक REO णसहस्साई सूरे उहुँ उपत्तेणं अपंचदसमाई चंदे एगे एवमाहंसु १४, पनरस सूरे अद्धसोलसमाई चंदे' इति एगे पाणुतादि पुण एवमाहंसु ता पण्णरस जोयणसहस्साई सूरे उहं उच्चत्तेणं असोलसमाई चंदे एगे एवमाहंसु १५, 'सोलस सूरे परिवारः असत्सरसाई चंदे' इति एगे पुण एवमासु ता सोलस जोयणसहस्साई सूरे उहुं उच्चत्तेणं अद्भसत्तरसमाई चंदे एगे भ्यन्तरचाएवमाहेसु १६, 'सत्तरस सूरे अद्वारसमाई चंदे' इति एगे पुण एवमाइंसु ता सत्तरस जोषणसहस्साई सूरे उह रासू हा उच्चचेणं अवहारसमाई चंदे एगे एवमाहंसु १७, 'अट्ठारस सूरे अद्धएगूणवीसमाई बंदे' इति एगे पुण एवमाहंसNeel ता अट्ठारस जोयणसहस्साई सूरे उहूं उच्चतेणं अद्धएगूणवीसमाई चंदे एगे एबमासु १८ 'एगूणवीस सूरे अद्भवी-1 समाई चंदे' इति एगे पुण एवमासु ता एगूणवीसं जोयणसहस्साई सूरे उडे उच्चत्तेणं अद्भवीसमाई चंदे एगे एबमाइंसु 11१९, 'बीस सूरे अद्धएकवीसमाई चंदे' इति एगे पुण एवमाहंसु ता वीस जोयणसहस्साई सूरे उहं उपत्रेण अद्धपकपीसमाहं चंदे एगे एबमाईसु २०, एकवीसं सूरे अदयावीसमाई चंदे' इति एगे पुण एवमाईस वा इकवीसं जोप ॥२६॥ *णसहस्साई सूरे उह उच्चत्तेणं अद्धबाबीसमाई चंदे एगे एबमाइंसु २१, 'बावीस सूरे अहतेवीसाई चंदे' इति एगे। पुण एवमासु ता पापी जोयणसहस्साई सूरे उहूं उच्चत्तेणे भतेवीसमाई हे एगे एवमासु २२ तेवीसं सूरे दीप अनुक्रम [११७ -१२२ ~530~
SR No.035021
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 21 Sooryapragyapti Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages610
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_suryapragnapti
File Size132 MB
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