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________________ आगम (१६) प्रत सूत्रांक [६०] दीप अनुक्रम [८७] “सूर्यप्रज्ञप्ति” – उपांगसूत्र -५ (मूलं + वृत्तिः) - प्राभृतप्राभृत [२२], मूलं [६०] प्राभृत [१०], पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधितः मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित.. आगमसूत्र - [१६] उपांगसूत्र- [ ५ ] "सूर्यप्रज्ञप्ति " मूलं एवं मलयगिरि-प्रणीता वृत्तिः सूर्यप्रशशिवृत्तिः ( मल० ) ॥१७५॥ जे णं णव मुहते सत्तावीसं च सत्तद्विभागे मुहुत्तस्स चंद्रेण सद्धिं जोयं जोएंति, अस्थि नक्खत्ता जे णं पण्णरस मुहुसे चंदेण सद्धिं जोयं जोएति, अस्थि णक्खता जेणंतीसमुहुत्ते चंद्रेण सद्धिं जोयं जोएंति, अस्थि णक्खता जेणं पणयालीसं मुहुप्ते चंद्रेण सद्धिं जोयं जोएंति, ता एतेसि णं छप्पण्णाए णक्खत्ताणं कतरे णक्खसे जे णं णवमुहते सत्तावीसं च सप्तसट्टिभागे मुहुत्तस्स चंदेण सद्धिं जोयं जोपंति, कतरे णक्खत्ता जेणं पत्ररसमुहले चंद्रेण सद्धिं जोयं जोएंति, कतरे णक्खता जेणं तीसं मुहत्ते चंदेणं सद्धिं जोयं जोएंति, कतरे णक्खत्ता जे णं पणतालीस मुहुत्ते चंद्रेण सद्धिं जोयं जोएंति, ता एतेसि णं छप्पण्णाए णक्खत्ताणं तत्थ जे ते णक्खत्ता जे णं णव मुहुत्ते सत्तावीसं च सप्तद्विभागे मुहत्तस्स चंद्रेण सद्धिं जोयं जोएंति ते णं दो अभीयी, तत्थ जे ते णक्खत्ता जेणं पण्णरस मुहुत्ते चंदे सद्धिं जोयं जोएंति ते णं वारस, तंजहा- दो सत भिसया दो भरणी दो अहा दो अस्सेसा दो साती दो जेठ्ठा, तत्थ जे णं तीसं मुहुत्ते चंद्रेण सद्धिं जोयं जोपंति ते णं तीसं, तंजहा- दो सबणा दो घणिट्ठा दो पुछभद्दवता दो रेवती दो अस्सिणी दो कत्तिया दो संठाणा दो पुस्सा दो महा दो पुवा फग्गुणी दो हत्था दो चिन्ता दो अणुराधा दो मूला दो पुबासादा, तत्थ जे ते णक्खता जेणं पणतालीसं मुहुत्ते चंद्रेण सद्धिं जोपंति ते णं बारस, तंजहा- दो उत्तरापोडवता दो रोहिणी दो पुणइस दो उत्तराफग्गुणी दो विसाहा दो उत्तरासादा, ता एएसि णं छप्पण्णाए णक्खत्ताणं अस्थि णक्खत्ते जेणं चत्तारि अहोरत्ते छन् मुहुत्ते सूरिएण सद्धिं जोयं जोएंति, अत्थि णक्खत्ता जेणं छ अहोरते एकवीसं च Educatin internation For Parts Only ~360~ १० प्राभृते २२ प्राभृत. प्राभृते नक्षत्रयोगा दि सू ६० ॥१७५॥
SR No.035021
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 21 Sooryapragyapti Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages610
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_suryapragnapti
File Size132 MB
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