SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 241
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ आगम (१५) [भाग-१८] “प्रज्ञापना” – उपांगसूत्र-४ (मूलं+वृत्ति:) पदं [३], --------------- उद्देशक: -,-------------- दारं [१], -------------- मूलं [५५] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[१५]उपांगसूत्र-[४] "प्रज्ञापना" मूलं एवं मलयगिरि-प्रणीता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [५६] चित् द्वीपे आयामविष्कम्भाभ्यां सङ्खयेययाजनकोटीप्रमाणं मानसं नाम सरः समस्ति, ततो दक्षिणदिगपेक्षया अस्यां प्रभूतमुदकम् , उदकबाहुल्याच प्रभूता वनस्पतयः, प्रभूता द्वीन्द्रियाः शङ्खादयः प्रभूतास्तटलमशङ्खादिकलेवराश्रितास्वीन्द्रियाः पिपीलिकादयः प्रभूताः पद्मादिषु चतुरिन्द्रियाः भ्रमरादयः प्रभूताः पञ्चेन्द्रिया मत्स्यादय इति विशेषा-13 [धिकाः ॥ तदेष सामान्यतो दिगनुपातेन जीवानामल्पबहुत्वमुक्तम् ॥ इदानीं विशेषेण तदाह दिसाणुवाएणं सब्बत्थोवा पुढविकाइया दाहिणेणं उत्तरेणं विसेसाहिया पुरच्छिमेणं विसेसाहिया पच्छिमेणं विसेसाहिया । दिसाणुवाएणं सत्वत्थोवा आउक्काइया पच्छिमेणं, पुरच्छिमेणं विसेसाहिया, दाहिणेणं विसेसाहिया, उत्तरेणं विसेसाहिया । दिसाणुवाएणं सबथोवा तेउकाइया दाहिणुत्तरेणं, पुरच्छिमेणं संखेजगुणा, पच्छिमेणं विसेसाहिया ।। दिसाणुवाएणं सवत्थोवा बाउकाइया पुरच्छिमेणं, पच्छिमेणं विसेसाहिया, उच्चरेणं विसेसाहिया, दाहिणणं विसेसाहिया ।। दिसाणुवाएणं सच्चत्थोवा वणस्सइकाइया पच्छिमेणं पुरच्छिमेणं विसेसाहिया दाहिणेणं विसेसाहिया उचरेणं विसेसाहिया ।। दिसाणुवाएणं सवत्थीवा बेईदिया पच्छिमेणं पुरच्छिमेणं विसेसाहिया दक्षिणेणं विसेसाहिया उत्तरेण विसेसाहिया । दिसाणुवाएणं सवत्थोवा तेइंदिया पचस्थिमेणं, पुरच्छिमेणं विसेसाहिया, दाहिणणं विसेसाहिया, उत्तरेणं विसेसाहिया । दिसाणुवाएर्ण सञ्बत्थोवा चउरिंदिया पञ्चत्थिमेणं, पुरच्छिमेणं विसेसाहिया, दाहिणेणं विसेसाहिया, उत्तरेणं विसेसाहिया । दिसाणुचाएणं सबथोवा नेरइया पुरच्छिमपञ्चस्थिमउत्तरेणं, दाहिणणं असंखेजगुणा । दिसाणुवाएणं 06800rserserceneseseseem दीप अनुक्रम [२६०] tanataram.org ~241~
SR No.035018
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 18 Pragyapana Mool evam Vrutti Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages426
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_pragyapana
File Size93 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy