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________________ ... ४२१ ४८१ मूलाइका: ८६८ + ११४ भगवती (अगसूत्रस्य विषयानुक्रम दीप-अनुक्रमा: १०८७ मूलांक::| विषय: पृष्ठांक: मलांक: | विषय: पृष्ठांक: मूलांक: विषय: पृष्ठांक: |.....शतक - १४ ... .....शतक - १७ .....शतकं- १९ ६१५ | उद्देशक: ०६ आहार ७०६ | उद्देशक: ०४ क्रिया ४७० उद्देशक: ०८ निर्वृत्ति ६१८ | उद्देशक: ०७ संश्लिष्ट | उद्देशका: ६-११ पृथ्व्यादिकाय | उद्देशक: ०९ करण ६२४ | उद्देशक: ०८ अंतर ७१५ | उद्देशक: १२ एकेन्द्रिय ७७५ | उद्देशक: १० व्यंतर ६३१ | उद्देशक: ०९ अनगार ७१६ | उद्देशका:१३-१७ नागादिकुमार शतक - २० ६३६ | उद्देशक: १० केवली शतकं - १८ ७७९ | उद्देशक: ०१ बेईन्द्रिय शतकं - १५ | उद्देशक: ०१ प्रथम | उद्देशक: ०२ आकाश ६३७ | --गोशालक હરક | | उद्देशक: ०२ विशाखा ७८३ उद्देशक: ०३ प्राणवध शतकं - १६ ७२८ | उद्देशक: ०३ माकंदीपत्र ४८५ | उद्देशक: ०४ उपचय ६६० उद्देशक: ०१ अधिकरण ७३३ | उद्देशक: ०४ प्राणातिपात ७८६ | उद्देशक: ०५ परमाण ६६६ । उद्देशक: ०२ जरा ७३६ उद्देशक: ०५ असुरकुमार ७८९ उद्देशक: ०६ अंतर ६७० | उद्देशक: ०३ कर्म ७४० | उद्देशक: ०६ गुडवर्णादि ७९२ उद्देशक: ०७ बन्ध ६७२ | उद्देशक: ०४ जावंतिय ७४२ | उद्देशक: ०७ केवली ७९३ | उद्देशक: ०८ भूमि ६७३ | उद्देशक: ०५ गंगदत्त ७४९ | उद्देशक: ०८ अनगारक्रिया ८०१ उद्देशक: ०९ चारण ६७७ | उद्देशक: ०६ स्वप्न ७५० | उद्देशक: ०९ भव्यद्रव्य ८०३ | उद्देशक: १० आय ૬૮૨ | उद्देशक: ०७ उपयोग ७५३ उद्देशक: १० सोमिल शतक - २१ ६८३ | उद्देशक: ०८ लोक | शतकं - १९..... | वर्ग: १ शाली-आदि ०१५ ६८७ उद्देशक: ०९ बलिन्द्र ७५८ | उद्देशक: ०१ लेश्या | वर्गा:२-८ मूलअलसी, वंश, ०१८ ६८८ उद्देशक: १० अवधि ७६० उद्देशक: ०२ गर्भ | इक्षु,सेडिय, अमरुह, तुलसी ६८९ उद्देशक: ११-१४ दविपादि० ७६१ | उद्देशक: ०३ पृथ्वी शतक - २२ | शतकं- १७..... ७६५ | उद्देशक: ०४ महाश्रव ८२२ वर्गा:१-६ताड़,निम्ब,अगस्ति ०२१ ६९३ | उद्देशक: ०१ कुंजर ७६६ उद्देशक: ०५ चरम | बैंगन, सिरियक,पष्पकलिका ६९९ | उद्देशक: ०२ संयत ७६८ | उद्देशक: ०६ दवीप शतक - २३ ७०३ | उद्देशक: ०३ शैलेशी ७६९ उद्देशक: ०७ भवन ८२९ वर्गा:१-४आलू,लोही,आय,पाठा | ०२२ पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र- [०५] अंगसूत्र- [०५] "भगवती" मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचिता वृत्ति: ०१५ ८०६ ०२१ ... ०२२ ~12~
SR No.035011
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 11 Bhagavati Mool evam Vrutti Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages384
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size83 MB
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