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________________ Woo . ५६० मूलाका: ८६८ + ११४ भगवती (अग)सूत्रस्य विषयानुक्रम दीप-अनुक्रमा: १०८७ मूलांक: विषय: | पृष्ठांक: । मूलांक: विषय: पृष्ठांक: मलांक: | विषय: पृष्ठांक: | .....शतक -७ .....शतकं -१० .....शतकं - १२ ३७७ उद्देशक: १० अन्यतीर्थिक ४८२ उद्देशक: ०३ आत्मऋद्धि | उद्देशक: ०५ अतिपात शतकं-८ ४८७ उद्देशक: ०४ श्यामहस्ती ५४६ | उद्देशक: ०६ राह ३८१ उद्देशक: ०१ पद्गल ४८८ | उद्देशक: ०५ देव ५५० उद्देशक: ०७ लोक ३८९ | उद्देशक: ०२ आशीविष ४९० | उद्देशक: ०६ सभा ५५२ | उद्देशक: ०८ नाग ३९७ | उद्देशक: ०३ वृक्ष ४९३ उद्देशका: ०७-३४ अंतर्दवीप ५५४ | उद्देशक: ०९ देव उद्देशक: ०४ क्रिया | शतकं- ११ | उद्देशक: १० आत्मा ४०१ उद्देशक: ०५ आजीविक ४९४ | उद्देशक: ०१ उत्पल शतकं - १३ ४०५ | उद्देशक: ०६ प्रासकआहार ४९९ |उद्देशक: ०२ शालक ५६३ | उद्देशक: ०१ पृथ्वी ४१० | उद्देशक: ०७ अदत्तादान ५०० | उद्देशक: ०३ पलाश ५६७ | उद्देशक: ०२ देव | ४१२ | उद्देशक: ०८ प्रत्यनिक ५०१ | उद्देशक: ०४ कुम्भिक ५६८ उद्देशक: ०३ नरक ४२२ उद्देशक: ०९ प्रयोगबन्ध १०२ | उद्देशक: ०५ नालिक ५६९ | | उद्देशक: ०४ पृथ्वी ४३० | उद्देशक: १० आराधना ५०३ | उद्देशक: ०६ पद्म ५८४ | उद्देशक: ०५ आहार | शतक - १ ५०४ | उद्देशक: ०७ कर्णिक ५८५ | उद्देशक: ०६ उपपात ४३८ | उद्देशक: ०१ जम्बू ५०५ उद्देशक: ०८ नलिन ५८९ उद्देशक: ०७ भाषा ४४० | उद्देशक: ०२ ज्योतिष्क ५०६ उद्देशक: ०९ शिवराजर्षि ५९३ उद्देशक: ०८ कर्मप्रकृति ४४४ | उद्देशका: ०३-३० अंतविप ५१० उद्देशक: १० लोक ५९४ | उद्देशक: ०९ अनगारवैक्रिय ४४५ | उद्देशक: ३१ असोच्चा ५१४ | उद्देशक: ११ काल ५९५ उद्देशक: १० समुदघात | उद्देशक: ३२ गांगेय ५२५ उद्देशक: १२ आलभिका ... शतकं- १४..... ४६० उद्देशक: ३३ कुण्डग्राम | शतकं - १२..... ५९६ उद्देशक: ०१ चरम उद्देशक: ३४ परुषघातक ५२९ उद्देशक: ०१ शंख ६०० उद्देशक: ०२ उन्माद शतकं - १०..... ५३४ उद्देशक: ०२ जयंति ६०३ उद्देशक: ०३ शरीर ४७३ | उद्देशक: ०१ दिशा ५३७ उद्देशक: ०३ पृथ्वी ६०७ उद्देशक: ०४ पुदगल ४७७ | उद्देशक: ०२ संवृतअनगार ५३८ । उद्देशक: ०४ पुदगल ६१२ उद्देशक: ०५ अग्नि पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र- [०५], अंगसूत्र- [०५] "भगवती" मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचिता वृत्ति: | | | | | | | | !| 15 EE !! | FIRST ... .. ~114
SR No.035011
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 11 Bhagavati Mool evam Vrutti Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages384
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size83 MB
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