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मूलाका: ८६८ + ११४ भगवती (अग)सूत्रस्य विषयानुक्रम
दीप-अनुक्रमा: १०८७ मूलांक: विषय: | पृष्ठांक: ।
मूलांक: विषय: पृष्ठांक: मलांक: | विषय:
पृष्ठांक: | .....शतक -७
.....शतकं -१०
.....शतकं - १२ ३७७ उद्देशक: १० अन्यतीर्थिक ४८२ उद्देशक: ०३ आत्मऋद्धि
| उद्देशक: ०५ अतिपात शतकं-८ ४८७ उद्देशक: ०४ श्यामहस्ती
५४६ | उद्देशक: ०६ राह ३८१ उद्देशक: ०१ पद्गल ४८८ | उद्देशक: ०५ देव
५५० उद्देशक: ०७ लोक ३८९ | उद्देशक: ०२ आशीविष ४९० | उद्देशक: ०६ सभा
५५२ | उद्देशक: ०८ नाग ३९७ | उद्देशक: ०३ वृक्ष ४९३ उद्देशका: ०७-३४ अंतर्दवीप
५५४ | उद्देशक: ०९ देव उद्देशक: ०४ क्रिया | शतकं- ११
| उद्देशक: १० आत्मा ४०१ उद्देशक: ०५ आजीविक ४९४ | उद्देशक: ०१ उत्पल
शतकं - १३ ४०५ | उद्देशक: ०६ प्रासकआहार ४९९ |उद्देशक: ०२ शालक
५६३ | उद्देशक: ०१ पृथ्वी ४१० | उद्देशक: ०७ अदत्तादान ५०० | उद्देशक: ०३ पलाश
५६७ | उद्देशक: ०२ देव
| ४१२ | उद्देशक: ०८ प्रत्यनिक
५०१ | उद्देशक: ०४ कुम्भिक
५६८ उद्देशक: ०३ नरक ४२२ उद्देशक: ०९ प्रयोगबन्ध १०२ | उद्देशक: ०५ नालिक
५६९ | | उद्देशक: ०४ पृथ्वी ४३० | उद्देशक: १० आराधना ५०३ | उद्देशक: ०६ पद्म
५८४ | उद्देशक: ०५ आहार | शतक - १ ५०४ | उद्देशक: ०७ कर्णिक
५८५ | उद्देशक: ०६ उपपात ४३८ | उद्देशक: ०१ जम्बू
५०५ उद्देशक: ०८ नलिन
५८९ उद्देशक: ०७ भाषा ४४० | उद्देशक: ०२ ज्योतिष्क
५०६ उद्देशक: ०९ शिवराजर्षि
५९३ उद्देशक: ०८ कर्मप्रकृति ४४४ | उद्देशका: ०३-३० अंतविप ५१० उद्देशक: १० लोक
५९४ | उद्देशक: ०९ अनगारवैक्रिय ४४५ | उद्देशक: ३१ असोच्चा
५१४ | उद्देशक: ११ काल
५९५ उद्देशक: १० समुदघात | उद्देशक: ३२ गांगेय ५२५ उद्देशक: १२ आलभिका
... शतकं- १४..... ४६० उद्देशक: ३३ कुण्डग्राम
| शतकं - १२.....
५९६ उद्देशक: ०१ चरम उद्देशक: ३४ परुषघातक ५२९ उद्देशक: ०१ शंख
६०० उद्देशक: ०२ उन्माद शतकं - १०..... ५३४ उद्देशक: ०२ जयंति
६०३ उद्देशक: ०३ शरीर ४७३ | उद्देशक: ०१ दिशा ५३७ उद्देशक: ०३ पृथ्वी
६०७ उद्देशक: ०४ पुदगल ४७७ | उद्देशक: ०२ संवृतअनगार
५३८ । उद्देशक: ०४ पुदगल
६१२ उद्देशक: ०५ अग्नि पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र- [०५], अंगसूत्र- [०५] "भगवती" मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचिता वृत्ति:
| | | | | | | | !| 15 EE !! | FIRST
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