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________________ आगम (०५) [भाग-१०] "भगवती"-अंगसूत्र-५ (मूलं+वृत्ति:) शतक [१५], वर्ग [-], अंतर्-शतक [-], उद्देशक [-], मूलं [५४०] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र- [०५] अंगसूत्र- [०५] "भगवती" मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [५४०] सू.५४० दीप अनुक्रम [६३८] व्याख्या- भगवं गोयम एवं वयासी-(जण्णं) से बहुजणे अन्नमन्नस्स एवमाइक्खइ ४-एवं खलु गोसाले मंखलिपुत्ते । १५ गोशाप्रज्ञप्तिः जिणे जिणप्पलावी जाव पगासेमाणे विहरहतपणं मिच्छा, अहं पुण गोयमा । एवमाइक्खामि जाव परूअभयदेवी- मि-एवं खलु एयस्स गोसालस्स मंखलिपुत्तस्स मंखलिनामं मंखे पिता होत्या, तस्स णं मंखलिस्स मंखस्सा या वृत्तिः जाभहानामं भारिया होत्था सुकुमाल जाव पडिरूवा, तए णं सा भद्दा भारिया अन्नदा कदापि गुबिणी यावि| कोत्थानप रियानिक होत्या, तेणं कालेणं २ सरवणे नामं सन्निवेसे होत्था रिद्धस्थिमिए जाव सन्निभप्पगासे पासादीए ४, ॥६६॥ तत्थ णं सरवणे सन्निवेसे गोबहुले नाम माहणे परिवसति अढे जाव अपरिभूए रिउवेद जाव सुपरिनिहिजाए यावि होत्या, तस्स णं गोबहुलस्स माहणस्स गोसाला यावि होत्था, तए णं से मंखलीमंखे नामं अन्नया कयाइ भहाए भारियाए गुविणीए सद्धिं चित्तफलगहस्थगए मखत्तणेणं अप्पाणं भावेमाणे पुवाणुपुर्वि चरमाणे गामाणुगाम दूइज्जमाणे जेणेव सरवणे सन्निवेसे जेणेव गोबहुलस्स माहणस्स गोसाला तेणेव उबा०२ गोबहुलस्स माहणस्स गोसालाए एगदेसंसि भंडनिक्खेवं करेंति भंड०२ सरवणे सन्निवेसे उच्चनीयमज्झिमाई कुलाई घरसमुदाणस्स भिक्खायरियाए अडमाणे वसहीए सवओ समंता मग्गणगवेसणं करेति वसहीए सबओ समंता मग्गणवेसणं करेमाणे अन्नस्थ वसहिं अलभमाणे तस्सेव गोबहुलस्स माहणस्स गोसा G ॥६६॥ लाए एगदेसंसि वासावासं उवागए, तए णं सा भद्दा भारिया नवण्हं मासाणं बहुपडिपुन्नाणं अट्ठमाण राई दियाणं वीतिकंताणं सुसुमालजाव पडिरूवगं दारगं पयाचा, तए णं तस्स दारगस्स अम्मापियरो एक्का गोशालक-चरित्रं ~229~
SR No.035010
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 10 Bhagavati Mool evam Vrutti Part 3
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages514
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size111 MB
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