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________________ आगम (०५) [भाग-१०] "भगवती"-अंगसूत्र-५ (मूलं+वृत्ति:) शतक [१२], वर्ग [-], अंतर्-शतक -1, उद्देशक [१], मूलं [४३७-४३९] + गाथा पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र- [०५] अंगसूत्र- [०५] "भगवती" मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक % [४३७-४३९] % % गाथा जाप पडिजागरमाणस्स विहरित्तए, कप्पड़ मे पोसहसालाए पोसहियस्स जाव विहरित्तए, तं देणं देवागुप्पिया ! तुन्भे तं विउलं असणं पाणं खाइमं साइमं आसाएमाणा जाव विहरह, तए णं से पोक्खली समणोबासगे संखस्स समणोवासगस्स अंतियाओ पोसहसालाओ पडिनिक्खमइ २ त्ता सावधि नगरि मझमझेणं जेणेव ते समणोवासगा तेणेव उवागच्छद २ ते समणोवासए एवं बयासी-एवं खलु देवाणु|प्पिया ! संखे समणोवासए पोसहसालाए पोसहिए जाव विहरह, तं देणं देवाणुपिया! तुझे विउलं असणपाणखाइमसाइमे जाव विहरह, संखे णं समणोवासए नो हबमागच्छद । तए णं ते समणोवासगा तं विउलं असणपाणखाइमसाइमे आसाएमाणा जाव विहरति । तए णं तस्स संखस्स समणोवासगस्स पुवरत्तावरत्तकालसमयंसि धम्मजागरियं जागरमाणस्स अयमेयारवे जाव समुप्पज्जित्था-सेयं खलु मे कल्लं जाव जलते समर्ण भगवं महावीरं वंदित्ता नमंसित्ता जाव पजुवासित्ता तओ पडिनियत्तस्स पक्खियं पोसहं पारितएत्तिकहु एवं संपेहेति एवं २ कल्लं जाव जलते पोसहसालाओ पडिनिक्समति प० २ सुद्धप्पावेसाई मंगलाई वत्थाई पवर परिहिए सयाओ गिहाओ पडिनिक्खमति सयाओ गिहाओ पडिनिक्ख|मित्ता पादविहारचारेणं सावधि नगरि मझमझेणं जाच पजुवासति, अभिगमो नस्थि । तए णं ते || समणोवासगा कलं पादु० जाब जलंते पहाया कयवलिकम्मा जाव सरीरा सरहिं सरहिं गेहेहिंतो पडिनिक्खमंति सएहिं २ एगयओ मिलायंति एगयओ २ सेसं जहा परमं जाव पजुवा % -% दीप अनुक्रम [५२९-५३२] K-RE For P OW शंख नामक श्रमणोपासकस्य वृतांत ~17~
SR No.035010
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 10 Bhagavati Mool evam Vrutti Part 3
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages514
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size111 MB
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