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________________ आगम (०३) प्रत सूत्रांक [५८-६० ] टीप अनुक्रम [[१८-६०] [भाग-5] "स्थान" - अंगसूत्र - ३ ( मूलं + वृत्तिः) स्थान [२], उद्देशक [1]. मूलं [६] पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधितः मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित ... आगमसूत्र - [०३], अंग सूत्र - [०३ ] Education Immational क्रियानाम् द्वैविध्यं पं० [सं० पाणातिवायकिरिया चैव अपचक्खाणकिरिया चैत्र १०, पाणातिवायकिरिया दुविधा पं० [सं० - सहस्थपाणातिवायकिरिया चैव परहृत्थपाणातिवायकिरिया चैव ११, अपचक्खाण किरिया दुविहा पं० नं० - जीवअपचक्खाणकिरिया चैव अजीव अपचक्खाणकिरिया चैव १२, दो किरियाओ पं० तं० – आरंभिया चैव परिग्गहिया चेव १३, आरं मिया किरिया दुबिहा पं० तं० - जीवआरंभिया चेत्र अजीवआरंभिया चेव १४, एवं परिग्गहियावि १५, दो किरयाओ पं० [सं० -- मायावत्तिआ चैव मिच्छादंसणबत्तिया चेव १६, मायावत्तिया किरिया दुबिहा पं० सं० आयभावकणता चैव परभावत्रकणता चेव १७, मिच्छादंसणवत्तिया किरिया दुविहा पं० तं० ऊणाइरित्तमिच्छादंसणवत्तिया चैव तवइरित्तमिच्छादंसणवत्तिया चैत्र १८, दो किरियाओ पं० नं० - दिट्टिया चैव पुट्टिया चेव १९, दिट्टिया किरिया दुविहा पं० तं० - जीवदिट्टिया चेव अजीवदिडिया चैव २०, एवं पुट्टियादि २१, दो किरियाओ पं० नं० - पाडुच्चिया चैत्र सामंतोत्रणिवाइया चैव २२, पाडुनिया किरिया दुबिहा पं० तं० - जीवपाडुच्चिया चेव अजीवपाडुचिया चेव २३, एवं सामंतोवणियाइयादि २४, दो किरियाओं पं० तं० साहित्विया चैव सत्थिया चैव २५, साहत्थियाकिरिया दुविहा पं० [सं० जीवसाहत्विया चैव अजीवसाहत्थिया चैव २६, एवं सत्थियादि २७, दो किरियाओ पं० तं० - आणवणिया चैव वेयारणिया चैव २८, जहेव सत्थियाओ २९-३०, दो किरियाओ पं० नं० - अणाभोगवत्तिया चेव अणवखवत्तिया चैत्र ३१, अणाभोगवत्तिया किरिया दुबिहा पं० नं० - अणाउस आइयणता चैव अणाउत्तपमञ्जणता चेव ३२, अणवकखवत्तिया किरिया दुबिहा पं० तं० - आयसरीरअणवकं खवत्तिया चेव परखरीरअणव For Personal & Pre Use Only "स्थान" मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचित वृत्तिः ~ 89~
SR No.035005
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 05 Sthan Mool evam Vrutti Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages594
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_sthanang
File Size123 MB
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