SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 436
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ आगम (०३) [भाग-5] “स्थान" - अंगसूत्र-३ (मूलं+वृत्ति:) स्थान [४], उद्देशक [२], मूलं [२८४] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित....आगमसूत्र - [०३], अंग सूत्र - [०३] "स्थान" मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचित वृत्ति: श्रीस्थाना- सूत्र 43434 उद्देशः२ प्रत वृत्तिः सूत्रांक २८४] ॥२१३॥ महाप्रतिला पदः सू०२८५२८६ २८७ दीप अनुक्रम [३०३] दाने-भिक्षणे याच्आया भवः सामुदानिकः तस्य नो सम्यग्गवेषयिता-अन्वेष्टा भवति, इत्येवंप्रकार:-एतैरनन्तरोदितैरित्यादि निगमनम्, एतद्विपर्ययसूत्रं कण्ठ्यं । निग्रन्थप्रस्तावात्तदकृत्यनिषेधाय सूत्रे नो कप्पति निग्गंधाण वा निगगंधीण वा चाहिं महापाडिवएहि सज्झायं करेत्तए, तं०-भासाहपाडिवए इंदमहपाडिवए कत्तियपाटिवए सुगिम्हपाडिवए १, णो कप्पइ निग्गंधाण वा निग्गंधीण या चाहिं संझाहि सज्झायं करेत्तए, तं०पढमाते पच्छिमाते माहे अडरते २॥ कापड निग्गंथाण वा निग्गंथीण वा चाउकालं सज्झायं करेत्तए, सं०-पुन्वण्हे, अबरण्हे पोसे पसे (सू०२८५) चउबिहा लोगहिती पं० २०-आगासपतिहिए बाते वावपतिहिए उदधी उदधिपतिट्ठिया पुढवी पुढविपइद्विया तसा थावरा पाणा ४ (सू० २८६) चत्तारि पुरिसजाता पं० त०-तहे नाममेगे नोतहे नाममेगे सोपत्थी नाममेगे पधाणे नाममेगे ४, चत्तारि पुरिसजाया पं० सं०-आयंतकरे नाममेगे णो परंतकरे १ परंतकरे णाममेगे णो आतंतकरे २ एगे आतंतकरेवि परंतकरेवि ३ एगे जो आतंतकरे णो परंतकरे ४, २, पत्तारि पुरिसजाता पं० २०-आतंतमे नाममेगे नो परंतमे परंतमे नो (ब) ४, ३, चत्वारि पुरिसजाया पं० तं०-आयंदमे नाममेगे णो परंदमे ४, ४, (सू० २८७) चउन्विधा गरहा पं० त०-वसंपज्जामित्तेगा गरहा वितिगिच्छामिलेगा गरहा जंकिंचिमिच्छामीत्तेगा गरहा एवंपि पन्नत्तेगा गरहा (सू० २८८) 'नो कप्पईत्यादिके कण्ठ्ये, केवलं महोत्सवानन्तरवृत्तित्वेनोत्सवानुवृत्या शेषप्रतिपद्धर्मविलक्षणतया महाप्रतिपदस्तासु, इह च देशविशेषरूळ्या पाडिवएहिंति निर्देशः, स्वाध्यायो-नन्द्यादिसूत्रविषयो वाचनादिः, अनुप्रेक्षा तु नं निषि 3 | ॥२१ 53 'अस्वाध्याय'-दिवस सम्बन्धी कथनं ~436~
SR No.035005
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 05 Sthan Mool evam Vrutti Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages594
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_sthanang
File Size123 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy