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________________ आगम (०३) [भाग-5] "स्थान" - अंगसूत्र-३ (मूलं+वृत्ति:) स्थान [४], उद्देशक [२], मूलं [२८०] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित...आगमसूत्र - [०३], अंग सूत्र - [३] "स्थान" मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचित वृत्ति: प्रत सूत्रांक [२८०] एवं अजपरिवाए १६ । अजपरियाले १७, एवं सत्तर आलावगा १७, जहा दीणेणं भणिया तहा अजेणवि भाणियव्या, चत्तारि पुरिसजाया पं० सं०-अजे णाममेगे अजमावे अजे नाममेगे अणजभावे अणजे नाममेगे अजभावे अणजे नाममेगे अणजभावे १८ (सू० २८०) चत्तारि उसभा पं० २०-जातिसंपन्ने कुलसंपन्ने पलसंपन्ने रूवसंपन्ने, एवामेव, पत्तारि पुरिसजाता पं० त०-जातिसंपन्ने जाब रूवसंपन्ने १, चत्तारि उसभा पं० सं०-आतिसंपन्ने णाम एगे नो कुलसंपण्णे, कुलसंपण्णे नाम एगे नो जाइसंपण्णे, एगे जातिसंपण्णेवि कुलसंपण्णेचि, एगे नो जातिसंपण्णे नो कुलसंपन्ने, एवामेव चत्तारि पुरिसजाया पं० सं०-जातिसंपन्ने नाममेगे ४, २, पत्तारि खसभा पन्नत्ता -जातिसंपन्ने नाम एगे नो बलसंपने, एवामेव चत्तारि पुरिसजाया पं० त०-जातिसंपन्ने ४, ३, चत्तारि उसभा पं० सं०--जाइसंपन्ने नाम एगे नो स्वसंपन्ने ४, एषामेव चत्तारि पुरिसजाया पं० २०-आतिसंपन्ने नाम एगे नो रूवसंपले, रूपसंपन्ने णाममेगे ४,४, पत्तारि उसमा पं० ०-कुलसंपन्ने नाम एगे नो बलसंपन्ने ह ४ एवामेव चत्तारि पुरिसजाया पं० सं०कुलसंपन्ने नाममेगे नो बलसंपन्ने ह४, ५, चत्तारि सभा पं० त०-कुलसंपन्ने णाममेगे णो रूवसंपने, ४, एबामेव पत्तारि पुरिसजाना पं०-कुल ४, ६, चत्तारि उसभा पं००लसंपने णार्म एगेनो रुवसंपण्णे ४४ एवामेव चत्तारि पुरिसजाया पण्णत्ता तं०-बलसंपण्णे नाममेगे ५,७॥ चत्तारि हत्थी पं०२०-भरे मंदे मिते संकिन्ने, एवामेव चत्तारि पुरिसजाया पं० सं०-भरे मंदे मिते संकिन्ने, चत्तारि हत्थी पं० २०-भरे णाममेगे भरमणे, भरे णाममेगे मंदमणे, भरे णामभेगे मियमणे, भरे नाममेगे संकिनमणे, एवामेव चत्तारि पुरिसजाया ५००-भरे णाम दीप अनुक्रम [२९४] wwwwjanmalay ~425~
SR No.035005
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 05 Sthan Mool evam Vrutti Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages594
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_sthanang
File Size123 MB
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