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________________ आगम (०३) प्रत सूत्रांक [ce] दीप अनुक्रम [ce] [भाग-5] "स्थान" अंगसूत्र - ३ ( मूलं + वृत्तिः) स्थान [२], उद्देशक [3]. मूलं [C] पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधितः मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित ... आगमसूत्र - [०३], अंग सूत्र - [०३ ] - Education intemational ताश्चैवं "गंगा १ सिंधू २ तह रोहियंस ३ रोहीणदी य ४ हरिकंता ५। हरिसलिला ६ सीयोया ७ सत्तेया होंति दाहिणओ ॥ १ ॥ सीया व १ नारिकांता २ नरकांता चेव १ रुप्पकूला ४ य । सलिला सुबण्णकूला ५ रत्तवती रत्त ७ उत्तरओ ॥ २ ॥” इति । जम्बूद्वीपाधिकारात् क्षेत्रव्यपदेश्यपुद्गलधर्माधिकाराच्च जम्बूद्वीपसम्बन्धि भरतादि सत्क का ललक्षणपर्यायधर्माननेकधाऽष्टादशसूत्र्याऽऽह जंबूदरीवे २ भरवसु वासेसु तीताए उस्सप्पिणीए सुसमदू समाए समाए दो सागरोवमकोडाकोडीओ फाले होत्या १, एवमिमी से ओसप्पिणीए जाव पन्नत्ते २ एवं आगमिस्साए उस्सप्पिणीए जाव भविस्सति ३, जंबूदीवे दीवे भरहेवसु वासेसु तीताए उस्सप्पिणीए सुसमाए समाए मणुया दो गाउयाई उ उचत्तेनं होत्था ४, दोन्नि य पलिओचमाई परमा पालइत्था ५, एवमिमीसे ओसप्पिणीए जाव पालयित्था ६, एवमागमेरसाते उस्सप्पिणीए जाव पालिस्संति ७, जंबुद्दीवे दीवे भरहेरवएसु वासेस एगसमये एगजुगे दो अरिहंतवंसा उप्पविंसु वा उप्पज्जेति वा उप्पज्जिस्तंति वा ८, एवं चक्कवट्टिबंसा ९, दसारवंसा १०, जंबूभरहेरवस्तु एगसमते दो अरहंता उपसुि वा उप्पज्जेति वा उप्पज्जिस्संति वा ११ एवं क्वट्टिणो १२, एवं वलदेवा एवं वासुदेवा ( दसारखंसा) जाव उप्पलिंसु वा उत्पति वा उपज्जिस्संति वा १३, जंबू० दोसु कुरासु मणुआ सया सुसमसुसममुतनिड्डि पत्ता पचणुभवमाणा विहरंति, तं० देवकुराए चैव उत्तर१ गंगासिन्धू तथा रोहितांशा रोहिनदी व हरिकान्ता। हरिसडिला शीतोदा सप्ता भवन्ति दक्षिणस्यां ॥१॥ क्षीता च नारीकान्ता नरकान्ता चैव रूप्यकूला च सलिला सुवर्णकुला रफनती रक्ता चोत्तरस्यां ॥ २ ॥ For Personal & Pre Only "स्थान" मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचित वृत्तिः ~ ~ 161~ www.janayo
SR No.035005
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 05 Sthan Mool evam Vrutti Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages594
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_sthanang
File Size123 MB
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