SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 481
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ आगम (०१) [भाग-2] “आचार"मूलं "-अंगसूत्र-१ (मूलं+नियुक्ति:+वृत्ति:) श्रुतस्कंध [२.], चुडा [१], अध्ययन [३], उद्देशक [३], मूलं [१२८], नियुक्ति : [३१२] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित मुनि दीपरत्नसागरेण पुन: संकलित..आगमसूत्र-[१], अंग सूत्र-[१] “आचार" "मूलं एवं शिलांकाचार्य-कृत् वृत्ति: प्रत सूत्रांक [१२८] श्रुतस्कं०२ चूलिका १ ईर्याध्य उद्देशः ३ (शी०) दीप अनुक्रम [४६२] श्रीआचा- यमष्याचार्योपाध्यायैरिवापरेणापि रक्षाधिकेन साधुना सह गच्छता हस्तादिसाटोऽन्तरभाषा च वर्जनीयेति द्रष्ट- रावृत्तिः व्यमिति ॥ किश्च से भिक्खू पाइपमाणे अंतरा से पाडिवहिया उवागरिछज्जा, ते णं पा० एवं बहजा-माध० स०! अवियाई इत्तो पडिवहे पासह, सं०-माणुरस वा गोणं वा महिसं वा पसुं वा पक्खि वा सिरीसिवं वा जलयर वा से आइक्खह दंसेह, तं नो आइक्विजा नो दंसिज्जा, नो तस्स तं परिनं परिजाणिज्जा, तुसिणीए उहिजा, जाणं वा नो आणति बइजा, तो सं० गामा० दू०॥ से भिक्खू वा० गा० दू० अंतरा से पाडि० उवा०, ते ण पा० एवं वइज्जा-आउ० स०! अवियाई इत्तो पनिवहे पासह उद्गपसूयाणि कंदाणि वा मूलाणि वा तया पत्ता पुष्फा फला बीया हरिया उदर्ग वा संनिहिवं अगणिं वा संनिखित्तं से आइक्खह जाव दूइजिज्जा ।। से भिक्खू वा० गामा० दूइजमाणे अंतरा से पानि उवा०, ते णं पाहि० एवं आउ० स० अवियाई इत्तो पडिबहे पासह जवसाणि वा जाव से णं पा विरूवरूवं संनिविट्ठ से आइक्सह जाव दूइजिजा ।। से मिक्खु वा० गामा० दूइज्जमाणे अंतरा पा० जाव आउ० स० फेवइए इत्तो गामे वा जाव रायहाणिं वा से आइक्खह जाव दूइजिजा ॥ से मिक्खू वा २ गामाणुगामं दूइजेजा, अंतरा से पाठिपहिया आउसंतो समणा ! केवइए इत्तो गामस्स नगरस्स वा जाव रायहाणीए वा मग्गे से आइक्खह, तहेब जाव दूइजिज्जा ।। (सू०१२९) 'से' तस्य भिक्षोर्गच्छतः प्रातिपथिकः कश्चित्संमुखीन एतयात्, तद्यथा-आयुष्मन् ! श्रमण ! अपिच किं भवता पथ्यागच्छता कश्चिन्मनुष्यादिरुपलब्धः १, तं चैवं पृच्छन्तं तूष्णीभावेनोपेक्षेत, यदिवा जानन्नपि नाहं जानामीत्येवं NORMALCC445 कस्कल M ~481~
SR No.035002
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 02 Aachaar Mool evam Vrutti Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages586
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_acharang
File Size117 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy