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________________ आगम (०१) [भाग-1] “आचार" - अंगसूत्र-१ (मूलं+नियुक्ति:+वृत्ति:) श्रुतस्कंध [१.], अध्ययन [१], उद्देशक [७], मूलं [१९], नियुक्ति: [१७१] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित मुनि दीपरत्नसागरेण पुन: संकलित.....आगमसूत्र-[१], अंग सूत्र-[१] “आचार" मूलं एवं शिलांकाचार्य-कृत् वृत्ति: प्रत सूत्रांक [५९] दीप से बेमि संति संपाइमा पाणा आहच्च संपयंति य फरिसं च खलु पुट्टा एगे संघायमावजंति, जे तत्थ संघायमावजंति ते तत्थ परियावजंति, जे तत्थ परियावर्जति ते तत्थ उद्दायंति, एत्थ सत्थं समारभमाणस्स इच्चेते आरंभा अपरिणाया भवंति, एत्थ सत्थं असमारभमाणस्स इच्चेते आरंभा परिणाया भवंति, तं परिणाय मेहावी णेव सयं वाउसत्थं समारंभेजा णेवऽपणेहिं वाउसत्थं समारंभावेजा णेवऽपणे वाउसत्थं समारंभंते समणुजाणेजा, जस्सेते वाउसत्थसमारंभा परिणाया भवंति से हु मुणी परिणायकम्मे (सू०५९) तिमि पूर्ववन्नेयं । सम्पति षड्जीवनिकायविषयवधकारिणामपायदिदर्शयिषया तन्निवृत्तिकारिणां च सम्पूर्णमुनिभावप्रदर्शनाथ सूत्राणि प्रक्रम्यन्ते एत्थंपि जाणे उवादीयमाणा, जे आयारे ण रमंति, आरंभमाणा विणयं वयंति, छंदो वणीया अज्झोववण्णा, आरंभसत्ता पकरंति संगं (सू०६०) एतस्मिन्नपि-प्रस्तुते वायुकाये, अपिशब्दात् पृथिव्यादिषु च समाश्रितमारम्भ ये कुर्वन्ति ते उपादीयन्ते-कर्मणा अनक्रम ६० SAREauraton international [166]
SR No.035001
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 01 Aachaar Mool evam Vrutti Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages314
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_acharang
File Size64 MB
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