SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 86
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ मेवाड़ की जैन पंचतीर्थी ६९ राजसिंहजी के राज्य में संघवी दयालदास ने यह चतुर्मुख प्रासाद बनवाया था और विजयगच्छीय श्री विनयसागरसूरि ने इसकी प्रतिष्ठा की थी" । इस लेख में, दयालशाह की और भी दो तीन पीढियों का उल्लेख मिलता है । इस मन्दिर की व्यवस्था करेडातीर्थ के साथ सम्बद्ध कर दीगई है । यात्रियों की सुविधा के निमित्त काँकरोली स्टेशन पर एक धर्मशाला बनाई जारही है और दूसरी दयालशाह के किले की तलहटी में । यह स्थान काँकरोली स्टेशन से लगभग तीन माइल दूर है । राजनगर और काँकरोली में भी हिन्दू धर्मशालाएँ मौजूद हैं । उपर्युक्त प्रकार से, मेवाड़ में केशरियाजी, करेड़ा, नागदा, (अदबदजी), देलवाडा और दयालशाह का किला ये पाँच तीर्थ दर्शनीय, प्राचीन और प्रत्येक प्रकार से महत्वपूर्ण हैं । केशरियाजी की यात्रा के निमित्त जानेवाले यात्रियों के लिये, मेवाड की यह पंचतीर्थी अवश्य यात्रा करने योग्य है । -:: Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034962
Book TitleMeri Mewad Yatra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVidyavijay
PublisherVijaydharmsuri Jain Granthmala
Publication Year1936
Total Pages124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy