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________________ मेवाड़ की जैन पंचतीर्थी ६१ श्री नेमिनाथ का नाम, श्री शीलविजयजी और श्री जिनतिलकसूरि ने अपनी अपनी तीर्थमालाओं में भी लिया है । श्री सोमतिलकसूरि ने एक स्तोत्र की रचना की है, जिसमें यहाँ का नेमिनाथ का मन्दिर पेथड़शाह द्वारा बनाये जाने का उल्लेख है । आजकल यहाँ न पार्श्वनाथ का मन्दिर है और न नेमि - नाथ का ही । केवल श्री अदबदजी - श्री शान्तिनाथ भगवान का ही मन्दिर है । यदि आसपास के शेष मन्दिरों की खोज की जावे, तो बहुत से शिलालेख तथा मूर्तियाँ प्राप्त हो सकती हैं । 1 शान्तिनाथ भगवान् के इस मन्दिर की पूजापाठ की व्यवस्था पहले तो अच्छी न थी । किन्तु आजकल एकलिंगजी में जो हाकिम साहब हैं, उन्होंने अपने सहायक ऑफिसरों में से तथा अन्य रीतियों से प्रयत्न करके पूजा की व्यवस्था की है । अतएव नियमित रूप से पूजा होती है । उदयपुर आनेवाले यात्रीलोग यहाँ की यात्रा अवश्य करें । पक्की सड़क है, मोटर, तांगे, गाड़ियाँ आदि सवारी जाती हैं । यहाँ से थोड़ी ही दूर, केवल ३-४ मील की दूरी पर देलवाडा तीर्थ है । ४ – देलवाड़ा एकलिंगजी से ३-४ मील दूर देलवाड़ा नामक ग्राम है । इस देलवाड़े में से प्राप्त हुए शिलालेखों के साथ, 'देवकुलपाटक' Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034962
Book TitleMeri Mewad Yatra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVidyavijay
PublisherVijaydharmsuri Jain Granthmala
Publication Year1936
Total Pages124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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