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________________ मेरी मेवाड़यात्रा के नेता बने हैं, उसे देखते हुए यह आशा की जा सकती है, कि यह संस्था भविष्य में अच्छा कार्य करेगी। उदयपुर में एक और भी संस्था है । उसका नाम हैजैन एसोसियेशन । कहा जाता है कि यह संस्था पहले तो अच्छा कार्य करती थी। परन्तु आजकल तो कई वर्षों से खूब आराम कर रही है। हां, जैन धर्मशाला की एक कोठरी के दरवाजे पर साइनबोर्ड लगा हुआ अवश्य ही पढ़ने को मिलता है। इस तरह, अनेक संस्थाओं का अस्तित्व रखनेवाले उदयपुर शहर में, जैनसंघ की एक महान् संस्था स्थापित हुई है, जिसका नाम है-'जनश्वेताम्बर महासभा'। यह महासभा जैनसंघ की महासभा है। उदयपुर तथा मेवाड़ के मन्दिरों की आसातना दूर करवाने, समस्त शिक्षण संस्थाओं को एक ही सूत्र से संचालित करने, भिन्न भिन्न दिशाओं में कार्य करनेवाली अन्यान्य संस्थाओं को एक ही संस्था से संबन्धित करके व्यवस्थापूर्वक उन सबका संचालन करने तथा साधु मुनिराजों से विनति करके उन्हें मेवाड़ में विचरवाने के पवित्र उद्देश्यों से इस संस्था की स्थापना की गई है। ओसवाल या पोरवाल, लोढ़ेसाज या बडे साज, सेठ या हुम्मड़, सभी फिरकों के लगभग चारसो मेम्बरों के द्वारा बनी हुई इस सभा में, उदयपुर की सभी संस्थाओं के आगेवान कार्यकर्ता संमिलित हैं। इसीलिये यह आशा रखना अनुपयुक्त न होगा, कि शनैः शनैः उदयपुर के सभी मन्दिर तथा सभी संस्थाएँ इस महासभा के साथ सम्बन्धित हो जायगी और सभी कार्य सुचासूरूप से चलने Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034962
Book TitleMeri Mewad Yatra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVidyavijay
PublisherVijaydharmsuri Jain Granthmala
Publication Year1936
Total Pages124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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