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________________ ४० मेरी मेवाड़यात्रा संस्था में अनेक विशेषताएँ हैं । जैसे कि यहाँ विद्यार्थियों के हृदयों में विद्या भरी नहीं जाती, बल्कि विद्यार्थी स्वयं ही अपनी शक्तियों को उन्नत करे और अपने ज्ञान का स्वयमेव विकास करे, ऐसे साधन प्रदान किये जाते हैं। इसी लिये, इस संस्था में विद्यार्थी का स्वभाव, उसकी शक्ति और उसका व्यक्तित्व समझने का प्रयत्न किया जाता है। इस संस्था में चित्रकारी, संगीत और कलाकौशल आदि के उपयुक्त साधन तो रक्खे ही गये हैं, किन्तु इन सब के साथ ही एक मानसिक-प्रयोगशाला भी बनाई गई है। इस प्रयोगशाला में, ऐसे यन्त्र रखे गये हैं, कि जिनसे बालक की एकाग्रता, अध्ययन की योग्यता, निर्भयता, चरित्रबल आदि अनेक मानसिक बातों का नाप निकाला जा सकता है। यह विद्याभवन, अनेक शिक्षितों-शिक्षाप्रेमियों के सहयोग से चल रहा है। इस संस्था के प्रधान हैं-श्री मोहनसिंहजी मेहता पी० एच-डी०, एम० ए० एल-एल० बी०, बार-एट-लॉ। २-राजस्थान महिला विद्यालय। यह संस्था भी उदयपुर की सार्वजनिक संस्थाओं में से एक है और है भी आदर्श संस्था। लगभग बीस वर्ष पूर्व उदयपुर में 'सार्वजनिक कन्याविद्यालय नामक एक संस्था स्थापित हुई थी, वही फल फूलकर और विस्तृत होकर आज इस संस्था के रूप में दिखाई दे रही है। चरित्रगठन, सुगृहिणीजीवन, मानसिक विकास, शारीरिक योग्यता, आर्थिक स्वावलंबन, आदि इस संस्था के मुख्य उद्देश्य हैं। इन्हों उद्देश्यों की पूर्ति के निमित्त, कन्या विद्यालय, महिला Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034962
Book TitleMeri Mewad Yatra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVidyavijay
PublisherVijaydharmsuri Jain Granthmala
Publication Year1936
Total Pages124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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