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[ जिमप्रभसूरि अने प्रयोगो संबंधमां सूक्ष्म ज्ञान थर्बु अने ए प्रयोगोने व्याख्यानद्वारा समजाववानी शक्ति प्राप्त थवी, सूरिपद-प्राप्ति थवी ए सर्वनो समय लक्ष्यमां लई विचार करतां जिनप्रभसूरिनो जन्म वि. सं. १३२५ लगभगमां थयो हशे एम संभावना करी शकाय. वि. सं. १५०३ मां सोमधर्मगणिए रचेली उपदेश-सप्ततिमां थयेला एक उल्लेखने तेमना जन्मसमय संबंधमां घटावीए तो वि. सं. १३३२ मां तेमनो जन्म कल्पी शकाय. तरुण वयमां ज तेमनी दीक्षा थई जणाय छे अने सूरिपद पण वि. सं. १३५२ पहेलां थयु होवू जोइये एम विचारी शकाय छे. वि. सं. १३९० सुधीनी तेमनी कृतियो जाणवामां आवी छे. वृद्धावस्थाने लीधे छेल्लां दशेक वर्ष तेमने निवृत्ति स्वीकारवानी जरूर पडी होय अने विक्रमनी चौदमी सदीना अंतमां तेमनुं अवसान थयु होय एम विचारतां तेमनी आयुष्य-मर्यादा लगभग ७५ पोणोसो वर्षनी संभवे छे. तेमनी देह-विलयनी भूमि निश्चितरूपमां जाणवामां आवी नथी, तेम छतां तेमना विहार अने वास-स्थानमां तथा ग्रन्थ-रचनामां दिल्ली, देवगिरि ( दोलताबाद ) अने अयोध्याने प्राधान्य मळ्युं होय तेम १. " दैन्त-विश्वमिते वर्षे श्रीजिनप्रभसूरयः ।
अभूवन भूभृतां मान्याः प्राप्तपद्मावतीवराः ॥" -उपदेशसप्तति ( जैन आत्मानंद सभा-भावनगर
द्वारा प्रकाशित पृ. ५८)
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