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________________ १२८ ] शाह जगसिंह [ जिनप्रभसूरि अने पर तथा जगतसिंह पर घणो प्रसाद विस्तार्यो हतो. एवी रीते जीवन पर्यंत पांच पुण्य वेळाने आराधतां अने सत्य भाषा बोलतां शेठ जगत् सिंहे जैनशासनने लांबा वखत सुधी जागतुं कर्यु हतुं. " उपर्युक्त जगतसिंह शेठनो पुत्र मदनसिंह पण चतुर होइ लोकोमा तेवो ज प्रख्यात भयो हतो. पहेलां खुरासाणनिवासी धनद नामनो वस्तुपति तेना पितानो प्रीतिपात्र हतो. जगत्सिंह स्वर्गवासी थया त्यारे ते योगिनीपुर (दिल्ली ) मां व्यवसाय माटे आव्यो हतो, अने तेने घरे पण आव्यो हतो. कुटुंबनुं कुशल तथा तेनो निर्वाह, व्यवसाय विगेरे पूछी जगत् सिंहनी जेम तेना पुत्र साधे पण व्यवहार करवानी इच्छावाळो थयो हतो, परंतु तेनी परीक्षा माटे तेणे उपाय कर्यो. मायावडे कृत्रिम आदर दर्शावी तेणे मदन सिंहने कछु के - ' तारा पिता पासेनुं मारुं जे लेणुं छे, ते तुं आप; कारण के घणां वर्षों सुधी में तारा बाप साथे व्यवहार कर्यो, पण परस्पर मळी जनागं शिव-शक्ति नामनां, मोतीओने लइ महणसिंह दिल्लीमां गयो इतो, अने त्यां पातशाहने नमीने गंगाजल जेवां निर्मल ए मोती भेट कर्या हतां. ए मोतीओनो प्रभाव सांभळी सुलतान चमत्कार पाम्या पातशाहे महणसिंहने पोसाना अंतःपुर (अनानखाना)नो रक्षाधिकारी बनाव्यो हतो. राजमान्य थइ ते सदा धन्य अने उदार बन्यो हतो. " (ए. क.) Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034907
Book TitleJinprabhsuri ane Sultan Mahommad
Original Sutra AuthorN/A
AuthorLalchandra Bhagwan Gandhi
PublisherJinharisagarsuri Gyanbhandar
Publication Year1939
Total Pages204
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size13 MB
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