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________________ सुलतान महम्मद.] जिन-प्रासाद केवीरीते कराव्यो ? [ ९१ साम्राज्य हाँ; जैन चैत्य करावनाराओने तेओ बलवडे अटकावता हता. ए वात सांभळीने देदना नंदन पेथडशाहे विचार्यु के-'जो कोइ पण रीते आ नगरमां विहार(जिनमंदिर) करावाय तो घणो लाभ थाय अने जैनदर्शननी प्रभावना थाय. फरी विचार कयों के 'तो हेमादि साथे हुं प्रेम धारण करूं, जेथी तेनी प्रेरणाद्वारा म्हारं आ प्रयोजन राजाथकी सिद्ध थाय. सर्वांग-पूर्ण लक्ष्मीवाळो आ राजा तो घणा सोनावडे, माणेकोवडे, घोडाओवडे के हाथीओवडे तुष्ट करी शकाय तेम नथी. 'प्रधानने संतुष्ट कर्या विना राजाने तुष्ट करवा'-ए न्याययुक्त नथी. 'बारणाना बिबने वि. सं. १२८८ वै. शु. १५ना निर्देश साथे ए संधिनी शरतो सूचवी छे के-" सिंहणदेवे अने महामंडलेश्वर राणा लावण्यप्रसादे पूर्व रूढि प्रमाणे पोतपोताना देशमा रहेg, कोइए पण कोइनी भूमि पर आक्रमण करवु नहि-दबाववी नहि; शत्रुथी हल्लो थाय तो एकबीजाए सैन्यनी सहायता करवी." सिंहणनी बिरुदावलीमां तेने 'गूर्जरराज-हस्त्यंकुश' तरीके तथा गूर्जरेश्वर वीसलदेवने 'सिंघणसैन्य-समुद्र-संशोषणवडवानल' तरीके ओळखावेल छे. उपर्युक्त चंद्रवंशी सिंहण पछी, जैत्रपाल पछी, राजधानी देवगिरि( दक्षिण )नी गादी पर आवेल महादेव राजाना अने तेना उत्तराधिकारी रामदेव राजाना राज्यमां (विक्रमनी ११ मी सदीना पूर्वार्धमां) श्रीकरणाध्यक्ष हेमाद्रि नामनो अतिबुद्धिशाली राज्याधिकारी थई गयो. पुराणो, स्मृतियो विगेरेमांथी उध्धृत करी Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034907
Book TitleJinprabhsuri ane Sultan Mahommad
Original Sutra AuthorN/A
AuthorLalchandra Bhagwan Gandhi
PublisherJinharisagarsuri Gyanbhandar
Publication Year1939
Total Pages204
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size13 MB
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