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________________ गधर लब्धिसें चौदहे पूर्व रचताहै और चार ज्ञानका धारक होताहै. तिसकों तीर्थंकर नगवंत गणधर पद देतेहै और साधुयोंके समुदाय रूप ग कों धारण करता है, तिसकों गणधर कहतेहै. प्र.६१-श्रीमहावीरजीके कितने गणधर हुए थे. उ.-ग्यारें गणधर हुए थे, तिनके नाम ऊपर लिख आएहै. प्र. ६२-संघ किसकों कहतेहै. न.-साधु १ साध्वी श्रावक ३ श्राविका ४ इन चारोंकों संघ कहतेहै. प्र. ६३–श्रीमहावीर नगवंतके संघमें मुख्य नाम किस किसका था. उ.-साधुयोंमे इंश्नूति गौतम स्वामी नाम प्रसिइ १ साधवीयोंमें चंपा नगरीके दधिबाहन राजाकी पुत्री साधवी चंदनबाला श्रावकोंमें मु. ख्य श्रावस्ति नगरीके वसने वाले संख १ शतक २ श्राविकायोंमें सुलसा ३ रेवती सुलसा राजगृहके प्रसेनिजित राजाका सारथी नाग तिसको नार्या और रेवती मेंढिक ग्रामकी रहने वाली Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034862
Book TitleJain Dharm Vishayak Prashnottar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Atmanand Sabha
PublisherJain Atmanand Sabha
Publication Year1907
Total Pages270
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size13 MB
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