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________________ १४४ | मुसलमान | मह एक ईश्वर| अनेक | पाठक | फकीर मत ९. म्मद शंकर शंकर एकब्रह्म आनंदगि शंकरभा | गिरिपुरि मत १०. री आदि ष्यादि | भारती पाठक । आदि रामानुज रामा एक इश्वर अनेक | रामानुज | साधु मत ११. नुज | रामचंद्र मत पाठक वैश्नव वलभ मत वल्ल एक ईश्वर | अनेक वल्लभ मत तिस मतके भाचा कृष्ण । पाठक साधु नही कबीर मत कबी एक ईश्वर | अनेक | तन्मत | गृहस्थ वा पाठक | साधु नानक | नाना एक ईश्वर | अनेक ग्रंथ पाठक. उदासी मत १४. क साधु दादूमत दाद एक ईश्वर सुंदर दा | तत् ग्रंथ | दादू पंथी सादि | पाठक | साधु गोरख मत गोर एक ईश्वर अनेक | तत् ग्रंथ | कानफटे पाठक | योगी मामीनारा सामो/एक ईश्वर | स्त्रो और | तत् ग्रंथ रंगे वस्त्रवायण १७. नारा परिग्रह | पाठक ले धोले वधारी । खां वाले | Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034862
Book TitleJain Dharm Vishayak Prashnottar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Atmanand Sabha
PublisherJain Atmanand Sabha
Publication Year1907
Total Pages270
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size13 MB
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