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________________ १४१ ज्ञान प्र एककरोड पद १६ हाथी पांचो ज्ञान मति आदि वाद पूर्व,१००..... ए प्रमाण. तिनका महा विस्तारसे क. ५ क पद न्यून. थन है. सत्य मएककरोड पद ३२ हाथी सत्य संयम घचन इन ती वाद पूर्व १००००००० प्रमाण. नोका विस्तारसे कथन है. ६६ पद अधिक आत्मप्र-छबीसकरोड ६४ हाथी | आत्मा जीव तिसका सावाद पूर्व पद. प्रमाण, नसों ७०० नयके मतोंसे ७ | २६००००००० स्वरूप कथन करा है. -~~ -~कर्म एक करोड अ१२८ हाथी ज्ञानावरणीयादि अष्ठ कर्मका वाद पूर्व स्सी हजार. प्रमाण. पकृति स्थिति अनुभावप्रदेशा ७ | १००८०००० दिसें स्वरूपका कथनकराहै. प्रत्या चोरासी लाख २६५ हाथी प्रत्याख्यान त्यागने योख्यान| पद, | प्रमाण. ग्य वस्तुयोका और त्याप्रवाद ८४००.०० |गका विस्तारसे कथन कपूर्व. ९/ विद्यानु एक करोड दा५१२ हाथी अनेक अतिशयवंत चमप्रवाद मास लाख पदः प्रमाण. विद्यायो कार करनेवाली अनेक वे. १० ११०००००० विद्यायोका कथन है, अवंध्य छब्बीस करो-१०२४ हा जिसमें ज्ञान, तप, संयपूर्व. ११/ ड पद. थी प्रमाण.पादिका शुन फल और | २६००००००० सर्व प्रमादादि पापोंका अ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat ___www.umaragyanbhandar.com
SR No.034862
Book TitleJain Dharm Vishayak Prashnottar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Atmanand Sabha
PublisherJain Atmanand Sabha
Publication Year1907
Total Pages270
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size13 MB
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