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________________ १४० पूर्व नाम पद संख्या शाहालिख विषय क्याहै. नमें कितनी उत्पाद। एक करा एक करोड ? एकहाथी सर्व द्रव्य और सर्व पर्या जितने शायांकी उत्पत्तिका स्वरूप १०.०... हीके ढेरसे कथन करा हे. लिखा जावे णोपर्व २छानवेलाख । हाथीप्रमा| सर्व द्रव्य और सर्व पर्याण शाहोसे य और सर्व जीव विशेषांएवं सर्वत्र के प्रमाणका कथन है. पद. - - - वीर्यपवा मित्तरलाख ४ हाथी | कर्म सहित और कर्म रपद. प्रमाण. हित सर्व जीवांका और सर्व अजीव पदार्थोके वीर्य अर्थात् शक्तिके स्वरूपका कथन है, अस्ति | साठलाख |८ हाथी | जो लोकमें धर्मास्तिका. नास्ति पद यादि अस्तिरूप है और प्रवाद | ६०००००० जोखर शृंगादि नास्तिरूप पूर्व ४ है तिसकाकथन है अथवा सर्व वस्तु स्वरूप करके अस्तिरूप है और पररूप करके नास्तिरूप है ऐसा कथन है. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034862
Book TitleJain Dharm Vishayak Prashnottar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Atmanand Sabha
PublisherJain Atmanand Sabha
Publication Year1907
Total Pages270
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size13 MB
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