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________________ - - - नसे प्रीती होतीनोएक घड़ी में लाखों पदार्थफलादिउत्प न होते हैं कोई मीठाकोईखट्टाकोईकड़वानीमन्नादि औररासीकीनोयपागणनाहैजोसयादिनरहतीहै घोर प्रत्यक्षदेखो तोमुसलमानईसाईनोरासनहीं मिलाने | उनमें प्रीनिक्यों होतीहैजबहमारेदेशमें गुण क्रमस्वभा|| घमनुकूल मिलाकरविवाह होताथा तबऐसीप्रीनिपुरु यस्त्री होतीथी कि एक दूसरेकेविकोवेसे पाणनक न्यागकरदेनेथे औरन व्यभिचारयहाथाक्योकिएकदूसरे के मियाय दोनोंके औरकोनमच्छामालूम होता | प्रश्नादूसरेमनी मेंजहांकहींप्रीतीदेखीनोअनुमान मि जानलोकियातोदई योगसेरासीमिल गई होगीया जामिलालेननो औरभीविशेषप्रीती होजानी उत्तर) आपके कहेकाप्रमाणभीयायेकिजो कछहम कहैवाही मत्यजान.लोऐसे तोहमभीकहदेंकिजहां कहीप्रीतीदेखीवदां अनुमानकरलोकियहोरासीनहीं मिलीओरामोमिलजातीतोप्रीतीनहोनीस्वभावही एक साहोगानवही प्रीती होगी ग्रहोकबीचमें डालकरयों मगड़ाडालनेहो प्रश्नांवाविधवा योगभीनदेखनाचाहियकोगहमीद है उत्तर) दौफयहोर्नियापकजोनशमेंबहुनसेबि शिवायोगकिसीवालविधवायोगकन्याक्षेत्राप्त या - - .. .... .air Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034854
Book TitleJain Aur Bauddh ka Bhed
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHermann Jacobi, Raja Sivaprasad
PublisherNavalkishor Munshi
Publication Year1897
Total Pages178
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size11 MB
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