SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 42
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ [३१] स्थान (पायःशिखर) को ढूंक शब्दसें बुलाया जाता है। ऐसी टुंके श्री सिद्धाचलजीपर नव प्रसिद्ध हैं। गिरनारजीपर कितनी ढूंके हैं ? किस किस ढूंकपर जिनमंदिर जिनप्रतिमानी है ? इस विषयका पुष्टप्रसिद्ध प्रमाण इसवक्त हमारे पास मौजूद नहो । तथापि-गिरिनार महात्म्यके लेखक ने जिन जिन ढूंकांके नाम लिखें है-उन महान् शासन प्रभावक, और शासनप्रेमियों के नाम हमभी दिङ्मात्र लिख देते हैं । वाचकांकों जहां कहीं गलती मालूम दे स्वयं सुधारकर वांचे, और हमे सुधारनेकी सूचना दें, ताकि किसी अन्य लेखमें उस सूचनाका सुधारा किया जाय। --**ढूंक-वस्तुपाल-तेजपाल मंत्री. गुजरात देशों-वल्लभोपुर-पंचासर-पाटणऔर धौलकामें-वावडा-चौलुक्य (सोलंकी ) और वाघेलावंशीय राजाओंका राज्य करना प्रसिद्ध है। वाघेलावंशके राजा वीरधवलके अमात्य वस्तुपाल-- Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Unwanay. Suratagyanbhandar.com
SR No.034829
Book TitleGirnar Galp
Original Sutra AuthorN/A
AuthorLalitvijay
PublisherHansvijayji Free Jain Library
Publication Year1921
Total Pages140
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy