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________________ घंटाकर्ष-कल्य [ ३३ गले पर बांधने से ताव चला जाता है, और शाकिनी डाकिनी भूत प्रेत पिशाच के उपद्रव में चौरासी बार सात दिन तक झाडने से सारा उपद्रव मिट जाता है, और शरीर में पीडा होती हो वह नाश हो जाती है । ॥ एक सो बत्तीस कोष्टक यंत्र || ऊपर बारह कोठे करना और वहीं से नीचे की ओर म्यारह कोठे बनाने से कुल एक सो बतीस कोठे होंगे, जिनमें ऊपर एक कोठा अलग बनाकर उसमें ( ह्रीं ) लिखना और फिर प्रथम कोठे से "ॐ घंटाकर्णो महावीर" इस तरह एक एक कोठे में एक एक अक्षर लिखते जाना यंत्र अष्टगंध से लिखना पवित्रता आदि का वर्णन ऊपर के विधानों में किया है उसी मुआफिक रख विधान करना और पंचामृत हवन करना जिसमें दूध, दही, शक्कर, घृत और खारक इन सबको मिश्रित करना, फिर यंत्र को पास में रखना जिससे रक्षा होगी, सहायता मिलेगी, सर्प का भय जायगा, शाकिन्यादि दोष मिटेगा और सुख सौभाग्य धन सम्पत्ति की वृद्धि होगी । (यंत्र मागे देख लेना ) ॥ चोकोर यंत्र रचना ॥ चोकोर यंत्र बनाकर उसको घंटा के आकार में www.umaragyanbhandar.com Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat
SR No.034826
Book TitleGhantakarn Kalp
Original Sutra AuthorN/A
AuthorChandanmal Nagori
PublisherChandanmal Nagori Jain Pustakalay
Publication Year
Total Pages72
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size26 MB
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