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________________ - घंटाकर्ण-कल्प परन्तु कपड़े मान जल भूमि शुद्धि आदि का जो विधान बताया है उसे नित्य करने की अावश्यकता नहीं रहती वस्त्र शुद्धि शरीर शुद्धि जैसी रखना चाहिए जिसका उपयोग रखे. दीपक नित्य साफ कर लिया करे और दीपक लालटेन में रखे, दीये की ज्योति जितनी प्रकाशमान होगी उतनी ही मंत्र शक्ति बढेगी, फल आदि नित्य भेट करना, रूपानाणा प्रथम दिन रखा हो वह स्मरण चले वहां तक रहने देना, कपडे नित्य साफ कर लेना, स्मरण चले उतने दिनों तक ब्रह्मचर्य पालना, भूमि शयन करना, दुव्र्यसन का त्याग करना सत्य बोलना और सोते समय पूर्व दिशा की तरफ सिर करके सोना, रात्रि में स्वप्न आये तो याद रखना स्वप्न आये बाद नींद नहीं लेना देव स्मरण में रात्रि व्यतीत कर प्रातः काल में फल हाथ में रख स्वप्न देव के समक्ष नयान कर फल भेट कर देना। ___घंटाकर्ण देव क्रूर स्वभावो है, इस लिए शक्ति के अनुसार आराधन करना किसी तरह का चमत्कार मालूम हो स्वप्न में दिखाव हो तो डरना नहीं, धीरज रखना-वैसे तो समयानुसार सत्र होता है देव प्रत्यक्ष आचें ऐसी पुन्यायी भी नहीं होती-देव तो परोक्ष रह कर ही भावना पूरी कर देते हैं, वर्तमान में ऐसे संघयन-मंठाण भी नहीं है तो भी Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034826
Book TitleGhantakarn Kalp
Original Sutra AuthorN/A
AuthorChandanmal Nagori
PublisherChandanmal Nagori Jain Pustakalay
Publication Year
Total Pages72
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size26 MB
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