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१४
लीये
१३४
कम
१४१
१४४
१४६ १५१
१५
इसमें
१५५
कमे जना
जैनी वायव्य इन वायव्य तथा उ
परवनीचे इन बजता बनता इनमें वात
बात स्वाति
स्वाति "वास्तवमें तो" यह पद "स्थविर
कल्पी" इसके पहले रख के पढ़ें। हो हो तो ऐसा। ऐक ऐसा ऐक
चले सम्यकत्व सम्यक्त्व
- १७
है..." .......
१८५
चल
१८६ १८७ ।
पहिले
१५
भष्यि
भविष्य
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