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[4] (७) पं० लोकनाथजी शास्त्री, मूडबिद्री
" आपका ऐतिहासिक दृष्टिसे लिखित महावीरचरित्र ... माननीय है।" (८) पं० देवकीनन्दनजी सिद्धान्तशास्त्री, कारंजा
"लेख बहुत ही खोजपूर्वक लिखा है । आपके साहित्यकी जो विशेषता है वह किसी विषयमें मतभेदके रहते हुए भी हमें
आदरणीय प्रतीत होती है। आपके साहित्यसे नई शिक्षासे भषित व्यक्तियोंका पर्ण रीतिसे स्थितिकरण होता है और
उससे जैनधर्मके विषयमें श्रद्धाकी भी वृद्धि होती है। () सम्पादक 'जैनमित्र' सूरत_ "लेख बहुत विद्वत्तापूर्ण और उपयोगी है।" (१०) सम्पादक 'जैनजगत्' अजमेर
"लेख है तो लम्बा परन्तु आवश्यक है।" (११) श्रीसुलतानमलजी सकलेचा, विल्लुपुरम् (मद्रास)
" भगवान महावीर और उनका समय' शीर्षक लेख बहुत
ही महत्वपूर्ण है।" नोट-पं०नाथूरामजी प्रेमी श्रादि दूसरे कई विद्वानोंकी सम्मतियों के लिये 'प्राक्कथन' देखिये ।
-प्रकाशक
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