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________________ ( २० ) varuvvvvwww.rrc~ (१) बालक। (२) वृद्ध । जो बिहार तथा भिक्षा आदिमें असमर्थ हो । (३) क्लीव । स्त्रीके अंग देखकर कामातुर होनेवाला । (४) नपुंसक। (५) जड़ अर्थात् स्थूल या निकम्मा। यह तीन प्रकारका होता है(क) भाषाजड़-जिसका उच्चारण खराबहो जिसे सभ्यता पूर्वक बोलना न माता हो अथवा जिसकी भाषा कोई समझ न सके। (ख) शरीर जड़-जिसका शरीर बहुत स्थल हो। (ग) करण जड़-जो अपांग अथवा विकलेन्द्रिय हो। (६) व्याधित-रोगी। (७) स्तेन-किसी प्रकारकी चोरी करनेकी आदत वाला। यदि कोई चोर चोरी छोड़ने की प्रतिज्ञा करके दीक्षा लेना चाहे, तो उसे भी शीघ्र दीक्षा न देनी चाहिए। कई वर्ष उसके चालचलनकी जाँच करनी चाहिए। (८) राजापकारी-किसी प्रकारसे राज्य अथवा राजपरिवार का गुनहगार। (8) उन्मत्त-पागल । (१०) मन्ध । (११) दास-खरीदा हुआ दास अथवा खरीदो हुई दासीसे पान व्यक्ति जो पैदा होते ही गुलाम माना जाता है। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034760
Book TitleBaldiksha Vivechan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorIndrachandra Shastri
PublisherChampalal Banthiya
Publication Year1944
Total Pages76
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
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