SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 7
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ समयधर्म सोनगढथी प्रगट थतुं पाक्षिक ता. २६-७-३६ ना अंकमां लखे छे के: श्रीविजयेन्द्रसूरिजीए लखेल : अशोकना शिलालेख उपर दृष्टिपात ' नामर्नु पुस्तक अमोने मल्युं छे. आ पुस्तकमां अशोकना शिलालेखो संबंधी सारो प्रकाश पाडवामां आव्यो छे. श्रीमान् डा. त्रिभोवनदास लहेरचंद शाहे अशोकना शिलालेखोने संप्रति राजाना शिलालेखो कह्या छे ते संबंधी स्फोट दाखला दलीलो साथे करी श्री विजयेन्द्रसूरिजीए साबित करी आप्यु छे के ते शिलालेखोने डा. संप्रतिराजाना शिलालेख कहे छे ए वात गलित छे. आ पुस्तक भूत इतिहास उपर सारो प्रकाश पाडे छे. गूजराती मुंबइथी प्रकाशित थतुं अठवाडिक सन् १९३६. ऑक्टोबर ता. ४ थी ना अंकमां लखे छे के: · आ नानकडा ग्रंथमां डॉ. त्रिभुवनदासं ल. शाहे प्रकट करेला प्राचीन भारतवर्ष भाग पहेलानुं खंडन छे. लेखक पण समर्थ इतिहासवेसा अने विचारक जणाय छे. तेमणे डॉ. शाह क्यां क्यां अनुमानो करवामां भीत भूल्या छे ते विगतवार दर्शाव्युं छे. तेओ जणावे छे के अशोक महाराजा जैन नहिं पण बौद्धधर्मी हता. तेना शिलालेखोमां जे प्रियदर्शिन ,राजानुं नाम आवे छे ते महाराजा अशोकनुं ज छे. सेन्ड्रोकोटस तेज चंद्रगुप्त छे. तेओ जणावे छे के डा. शाहने संस्कृत भाषानुं सादा के उंचा व्याकरणY शुद्ध व्युत्पत्तिपूर्वके ज्ञान न होवार्थी भळती शब्द साम्यता Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034754
Book TitleAshokna Shilalekho Uper Drushtipat Namna Pustak Sambandhi Ketlak Prasiddha Paper ane Masikoma Pragat thayela ane Tadvishyagna Vidvanona Ketlak Abhiprayo
Original Sutra AuthorN/A
AuthorYashovijay Jain Granthmala
PublisherYashovijay Jain Granthmala
Publication Year1936
Total Pages18
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size3 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy