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आभारी छं. आचार्य श्री विजयेन्द्रसरिए आ बन्ने पुस्तको तैयार करवामां घणो श्रम लीधो होय तेम जणाय छे. पूरातत्त्वना अभ्यासीओने ए पुस्तको बहु उपयोगी नीवडशे एम हुं मानुं छु.
विठ्ठलदास खीमचंद पटेल
वीर ता. १५ अगस्त १९३६ एटा.
इतिहास का खून. बड़ौदा की शशिकांत कं० ने एक बृहत् पुस्तक 'प्राचीन भारत वर्ष' के नाम से गुजराती में प्रगट की है। उसके लेखक डॉ० त्रिभुवनलाल शाह नामक कोई जैन महानुभाव हैं ! पुस्तक लिखने में उन्होंने काफी श्रम उठाया है । परंतु साथ ही अपने मन के लड्डुओं को भी उस में खूब फोड़ा है ! पुस्तक गुजराती में है और हमने देखी मी नहीं है, परंतु हमारे जिन विद्वान मित्र ने उसे देखा है और उसके विषय में जो कुछ उन्हों ने लिखा है उससे प्रगट है कि पुस्तक में बेदर्दी से जान बूझ कर इतिहास का खून किया गया है । हर कोई जानता है दक्षिण भारत की विशालकाय गोम्मट मूर्तियां नम और दिग० जैनाम्नाय की हैं। उन्हें वीरवर चामुण्डराय, तिम्मरामादि नरपुत्वों ने स्थापित कराया था। किंतु हमारे मित्र लिखते हैं कि उन्हें डा० सा० सम्राट सम्प्रति की निर्माण की हुई बताते हैं । और उनका
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