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________________ १५ are.amaru.ac.mammmmmmmm ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ बात सिद्ध भी होती है क्योंकि सबसे पहले तो वि. सं. १०८० में पाटण में राजा दुर्लभ का राज ही नहीं था। इतिहास की शोध खोज से यह निश्चय हो चुका है कि पाटण में राजा दुर्लभ का राज वि. सं. १०६६।। से १०७८ तक रहा था, जिसके लिये मैं पाटण राजाओं की वंशावली यहां उद्धृत कर देता हूँ। पाटण नगर वनराज चावड़ा ने वि. सं. ८०२ में बसाया था, बाद वहां पर कौन कौन राजाने कितने कितने वर्ष राज किया जैसे : __ चावड़ा वंश के राजा १. वनराज चावड़ा, राज्य काल - वि. सं. ८०२ से ८६२ तक कुल ६० वर्ष २. योगराज चावड़ा, राज्य काल - वि. सं. ८६२ से ८९७ तक कुल ३५ वर्ष ३. खेमराज चावड़ा, राज्य काल ___- वि. सं. ८९७ से ९२२ तक कुल २५ वर्ष ४. भूवड़ चावड़ा, राज्य काल - वि. सं. ९२२ से ९५१ तक कुल २९ वर्ष ५. वैरीसिंह चावड़ा, राज्य काल - वि. सं. ९५१ से ९७६ तक कुल २५ वर्ष ६. रत्नादित्य चावड़ा, राज्य काल - वि. सं. ९७६ से ९९१ तक कुल १५ वर्ष ७. सामन्तसिंह चावड़ा, राज्य काल - वि. सं. ९९१ से ९९८ तक कुल ०७ वर्ष इस तरह चावड़ा वंश के राजाओं ने १९६ वर्ष राज्य किया, अनन्तर सोलंकी वंश का राज हुआ वह क्रम इस प्रकार है : सोलंकी वंश के राजा ८. मूलराज सोलंकी, राज्य काल - वि. सं. ९९८ से १०५३ तक कुल ५५ वर्ष ९. चामुण्डराय सोलंकी, राज्य काल - वि. सं. १०५३ से १०६६ तक कुल १३ वर्ष १०. वल्लभराज सोलंकी, राज्य काल - वि. सं. १०६६ से १०६६।। तक केवल ६ मास ११. दुर्लभराज सोलंकी, राज्य काल - वि. सं. १०६६॥ से १०७८ तक कुल ११।। वर्ष १२. भीमराज सोलंकी, राज्य काल - वि. सं. १०७८ से ११२० तक कुल ४२ वर्ष १३. करणराज सोलंकी, राज्य काल - वि. सं. ११२० से ११५० तक कुल ३० वर्ष १४. जयसिंह सोलंकी, राज्य काल - वि. सं. ११५० से ११९९ तक कुल ४९ वर्ष १५. कुमारपाल सोलंकी, राज्य काल - वि. सं. ११९९ से १२३० तक कुल ३१ वर्ष १६. अजयपाल सोलंकी, राज्य काल - वि. सं. १२३० से १२६६ तक कुल ३६ वर्ष १७. मूलराज सोलंकी, राज्य काल - वि. सं. १२६६ से १२७४ तक कुल ८ वर्ष सोलंकी वंश के राजाओं ने २७६ वर्ष तक राज्य किया, बाद में पाटण का राज बाघल-वंश के हस्तगत हुआ। उन्होंने वि.सं. १३५८ तक कुल ८४ वर्ष राज्य किया, फिर पाटण की प्रभुता आर्यों के हाथों से मुसलमानों के अधिकार में चली गई।
SR No.034715
Book TitleKhartar Gaccha Ka Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar Maharaj
PublisherRatnaprabhakar Gyan Pushpmala
Publication Year
Total Pages256
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size2 MB
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