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________________ सूत्र आगम सूत्र २७, पयन्नासूत्र-४, 'भक्तपरिज्ञा' सूत्र - ११९ खूबसूरत दिखनेवाली, सुकुमार अंगवाली और गुण से (दोर से) बंधी हुई नई जाई की माला जैसी स्त्री पुरुष के दिल को चुराती है। सूत्र - १२० लेकिन दर्शन की सुन्दरता से मोह उत्पन्न करनेवाली उस स्त्रियों के आलिंगन समान मदिरा, कणेर की वध्य (वध्य पुरुष के गले में पहनी गई) माला की तरह पुरुष का विनाश करती है। सूत्र-१२१ स्त्रिओं का दर्शन वाकई में खूबसूरत होता है, इसलिए संगम के सुख से क्या लाभ ? माला की सुवास भी खुशबूदार होती है, लेकिन मर्दन विनाश समान होता है। सूत्र - १२२ साकेत नगर का देवरति नाम का राजा राज के सुख से भ्रष्ट हआ क्योंकि रानी ने पांगले के राग की वजह से उसे नदी में फेंक दिया और वो नदी में डूब गया । सूत्र-१२३ स्त्री शोक की नदी, दुरित की (पाप की) गुफा, छल का घर, क्लेश करनेवाली, समान अग्नि को जलानेवाले अरणी के लकड़े जैसी, दुःख की खान और सुख की प्रतिपक्षी है। सूत्र - १२४ काम रूपी तीर के विस्तारवाले मृगाक्षी (स्त्री) के दृष्टि के कटाक्ष के लिए मन के निग्रह को न जाननेवाला कौन-सा पुरुष सम्यक् तरीके से भाग जाने में समर्थ होगा? सूत्र-१२५ ____ अति ऊंचे और घने बादलवाली मेघमाला जैसे हड़कवा के विष को जितना बढ़ाती है उसी तरह अति ऊंचे पयोधर (स्तन) वाली स्त्री पुरुष के मोह विष को बढ़ाती है। सूत्र - १२६ इसलिए दृष्टिविष सर्प की दृष्टि जैसी उस स्त्रियों की दृष्टि का तुम त्याग करना; क्योंकि स्त्रियों के नयनतीर चारित्र समान प्राण को नष्ट करते हैं। सूत्र - १२७ ___ स्त्री के संग से अल्प सत्त्ववाले मुनि का मन भी अग्नि से पीगलनेवाले मोम की तरह पीगल जाता है। सूत्र - १२८ यदि सर्व संग का भी त्याग करनेवाला और तप द्वारा कुश अंगवाला हो तो भी कोशा के घर में बँसनेवाले (सिंह गुफावासी) मुनि की तरह स्त्री के संग से मुनि भी चलायमान होते हैं। सूत्र - १२९, १३० शृंगार समान कल्लोलवाली, विलासरूपी बाढ़वाली और यौवन समान पानीवाली औरत रूपी नदी में जगत के कौन-से पुरुष नहीं डूबते ? धीर पुरुष विषयरूप जलवाले, मोहरूप कादववाले, विलास और अभिमान समान जलचर से भरे और मद समान मगरमच्छवाले, यौवन समान सागर को पार कर गए हैं। मुनि दीपरत्नसागर कृत् “(भक्तपरिज्ञा)” आगम सूत्र-हिन्दी अनुवाद” Page 15 Page 15
SR No.034694
Book TitleAgam 27 Bhaktaparigna Sutra Hindi Anuwad
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDipratnasagar, Deepratnasagar
Publication Year2019
Total Pages20
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 27, & agam_bhaktaparigna
File Size2 MB
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