SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 216
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ आगम सूत्र ५, अंगसूत्र- ५, 'भगवती / व्याख्याप्रज्ञप्ति-2' शतक- २६ उद्देशक- ३ सूत्र - ९८२ ! भगवन्! क्या परम्परोपपन्नक नैरयिक ने पापकर्म बाँधा था ? गौतम प्रथम और द्वीतिय भंग जानना । प्रथम उद्देशक समान परम्परोपपन्नक नैरयिक में पापकर्मादि नौ दण्डक सहित यह उद्देशक भी कहना आठ कर्म प्रकृतियों में से जिसके लिए जिस कर्म की वक्तव्यता कही है, उसके लिए उस कर्म की वक्तव्यता अनाकारोपयुक्त वैमानिकों तक अन्यूनाधिकरूप से कहना । 'हे भगवन् ! यह इसी प्रकार है । शतक - २६ उद्देशक-४ सूत्र - ९८३ भगवन् ! क्या अनन्तरावगाढ़ नैरयिक ने पापकर्म बाँधा था ? इत्यादि प्रश्न । गौतम ! किसी ने पापकर्म बाँधा था इत्यादि क्रम से अनन्तरोपपन्नक के नौ दण्डकों सहित के उद्देशक समान अनन्तरावगाढ़ नैरयिक आदि वैमानिक तक अन्यूनाधिकरूप से कहना चाहिए। हे भगवन्! यह इसी प्रकार है। शतक - २६ उद्देशक- ५ — सूत्र - ९८४ ! भगवन् । क्या परम्परावगाढ़ नैरयिक ने पापकर्म बाँधा था? इत्यादि प्रश्न गौतम परम्परोपपन्नक के विषय में उद्देशक समान परम्परावगाढ़ (नैरयिकादि) के विषय में यह अन्यूनाधिक रूप से कहना चाहिए। हे भगवन् ! यह इसी प्रकार है। शतक - २६ उद्देशक ६ शतक / वर्ग / उद्देशक / सूत्रांक — सूत्र - ९८५ '' भगवन्! क्या अनन्तरावगाढ़ नैरयिक ने पापकर्म बाँधा था? इत्यादि प्रश्न गौतम अनन्तरोपपन्नक उद्देशक समान यह समग्र अनन्तराहारक उद्देशक भी कहना । शतक-२६ - उद्देशक- ७ सूत्र- ९८६ भगवन् ! क्या परम्पराहारक नैरयिक ने पापकर्म का बन्ध किया था ? इत्यादि प्रश्न । गौतम ! परम्परोप- पन्नक नैरयिकादि-सम्बन्धी उद्देशक समान परम्पराहारक उद्देशक कहना । शतक-२६ - उद्देशक-८ सूत्र- ९८७ भगवन् । क्या अनन्तपर्याप्तक नैरयिक ने पापकर्म बाँधा था ? अनन्तरोपपन्नक उद्देशक समान यह सारा उद्देशक कहना । हे भगवन्। यह इसी प्रकार है। शतक - २६ उद्देशक- ९ सूत्र - ९८८ भगवन् । क्या परम्परपर्याप्तक नैरयिक ने पापकर्म बाँधा था ? इत्यादि प्रश्न । गौतम परम्परोपपन्नक उद्देशक समान परम्परपर्याप्तक नैरयिकादि उद्देशक समग्ररूप से कहना । ! शतक - २६ उद्देशक- १० - सूत्र - ९८९ भगवन् ! क्या चरम नैरयिक ने पापकर्म बाँधा था ? परम्परोपपन्नक उद्देशक समान चरम नैरयिकादि समग्र उद्देशक कहना । हे भगवन्! यह इसी प्रकार है। मुनि दीपरत्नसागर कृत् " ( भगवती २ ) आगमसूत्र - हिन्द- अनुवाद” Page 216
SR No.034672
Book TitleAgam 05 Bhagwati Sutra Part 02 Hindi Anuwad
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDipratnasagar, Deepratnasagar
Publication Year2019
Total Pages254
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 05, & agam_bhagwati
File Size6 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy