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________________ घेताम्बर तेरापंप-मत समीक्षा । ८९ ** * *********** * * ३८ तुम्हारे साधु, दवाई ले करके उसकी फीस गृहस्थोंसे दिलवा देते हैं, यह किस सूत्रके आधारसे ?। ३९ ओसवालके सिवाय, और किसीको पूज्य नहीं छ. नाते, यह किस सूत्रके आधारसे ?। ४० तुम्हारे साधु, भिक्षाके समय पहिलेसे गली-महुछोंको सूचना करवा देते हैं, यह किस सूत्रकी आज्ञासे ?। ४१ साध्वियोंसे सूत्र बचवाते हैं, यह किस सूत्रकी आज्ञासे ?। ४२ साधु, होकरके किंवाड खोले या गृहस्थोंसे खूलवावे और उसके अन्दरकी वस्तु ग्रहण करे, यह किस मूत्रकी आज्ञासे। ४३ तुम्हारे साधु, अंधरेमें ही (४-५ बजे) गृहस्थनियोंसे वंदणा करवाते हैं, यह किस सूत्रकी आज्ञासे । ४४ तुम्हारे साधु, गृहस्थनियोंसे दिनमें भी सेवा करवाते हैं, यह किस सूत्रकी आज्ञा है ?।। . ४५ तुम्हारे साधु, सुतकवालेके घर जा करके दर्शन देते है, यह किस सूत्रकी आज्ञा है ? । ४६ तुम्हारे साधु, गृहस्थके घर जा करके व्याख्यान मूनाते हैं, यह किस सूत्रकी आज्ञासे सुनाते हैं । ४७ तुम्हारे साधु, एक ही घरसे जी चाहे उतनी रोटी उठाते हैं, यह किस सूत्रकी आज्ञासे ?। ४८ तुम्हारे साधु, तीसरे दिनका नियम करके गृहस्थ. के घरसे आहार लेते हैं, यह किस सूत्रकी आज्ञा है । ४९ तुम्हारे पूज्य, अपने कपड़े साध्वियाँसे सिलाते हैं, ओघा बनवाते हैं, कपडे धुलवाते हैं, यह किस सूत्रकी आज्ञा है। ५० साध्वियोंको बजारमें दो दुकानोंके बीचमें चौमासा Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034617
Book TitleShwetambar Terapanth Mat Samiksha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVidyavijay
PublisherHarshchandra Bhurabhai Shah
Publication Year1914
Total Pages98
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size18 MB
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