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________________ श्वेताम्बर तेरापंथ-मत समीक्षा | को उपदेश देते हैं, यह किस सूत्र के आधारसे ? १७ तुम्हारे साधु स्थानक में लाई हुई वस्तुको ग्रहण करते हैं, यह किस सूत्र के आधारसे ? । ८७ १८ खानेकी वस्तुएं रात्रिको रखना, यह साधुके लिये कीस सूत्रमें कहा है ? | १९ दुःखी जीवको, दुःखसे मुक्त नहीं करना, ऐसा कीस सूत्रमें कहा है ? | २० जीवको मारने में एक पाप और छुडाने में अढा रह पाप लगता है, ऐसा किस सूत्रमें कहा है ? । २१ तुम्हारे किसी साधुकी आँखोका तेज कम होजाय, तो वह चसमा रक्खे या नहीं ? अगर नहीं रक्खेगा तो जीवदया कैसे पालेगा ? । चसमा नहीं रखना, ऐसा किस सूत्र में कहा है ? | २२ तुम्हारे साधु, निरन्तर मुँहपर कंपडा बाँधे रहते हैं, इसका क्या कारण है ? इस तरह मूँह छिपा रखनेकी किस सूत्रमें आज्ञा दी है ? २३ मूँहपत्ति में दोरा रखनेका किस सूत्रमें फरमाया है ? २४ कुष्टेका गद्दी - तकिया जैसा बना करके, ऐश- आराम करना, यह किस सूत्रमें कहा है ? । २५ रात्रिके पडे हुए कपडोंकी पडिलेहणा साध्वियों से करानी, यह किस सूत्रमें कहा है ? । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034617
Book TitleShwetambar Terapanth Mat Samiksha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVidyavijay
PublisherHarshchandra Bhurabhai Shah
Publication Year1914
Total Pages98
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size18 MB
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