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________________ राष्ट्रकूटों के फुटकर लेख । राष्ट्रकूट राजा अभिमन्यु का ताम्रपत्र ही राष्ट्रकूटों की सबसे पुरानी प्रशस्ति है । इसके अक्षरों से यह विक्रम की सातवीं शताब्दी के प्रारम्भ के निकट का प्रतीत होता है । इसकी मुहर में दुर्गा के वाहन सिंह की मूर्ति बनी है। इस ताम्रपत्र में शिव की पूजा के लिए दिये दान का उल्लेख है । यह दान अभिमन्यु की राजधानी मानपुर में दिया गया था । बहुत से विद्वान् इस मानपुर को मालवे ( मऊ से १२ मील दक्षिण-पश्चिम ) का मानपुर अनुमान करते हैं । इस ( ताम्रपत्र ) में अभिमन्यु के पूर्वजों की वंशावली इस प्रकार दी है: १ मानाङ्क २ देवराज ३ भविष्य ४ अभिमन्यु मध्यप्रदेश ( बेतूल जिले ) के मुलताई गांव से राष्ट्रकूटों की दो प्रशस्तियां मिली हैं । इनमें की पहेली प्रशस्ति में, जो शक संवत् ५५३ ( वि० सं०६८८ =ई० स० ६३१ ) की है, राष्ट्रकूट राजाओं की वंशावली इस प्रकार मिलती है: १ दुर्गराज २ गोविन्दराज ३ स्वामिकराज ४ नन्नराज (१) ऐपिप्राफिया इण्डिका, भा• ८, पृ. १६४. (२) ऐपिग्राफिया इण्डिका, भा. ११, पृ. २७६. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034595
Book TitleRashtrakuto (Rathodo) Ka Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVishweshwarnath Reu
PublisherArchealogical Department Jodhpur
Publication Year1934
Total Pages182
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size27 MB
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