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________________ राजस्थान ( राजपूताना ) के पहले राष्ट्रकूट ३ मम्मट यह विदग्धराज का पुत्र था । वि. सं. ११६ ( ई. स. १३१. में का विद्यमान होना पाया जाता है। व ४ धवल यह मम्मट का पुत्र था। इसने मालवे के परमार राजा मुञ्ज के मेवाड़े पर चढाई कर जाट को. नष्ट करने पर मेवाड़ नरेश की सहायता की थी; सांभर के चौहान राजा दुर्लभराज से नाडोल के चौहान राजा महेन्द्र की रक्षा की थी; और अनहिलवाड़े ( गुजरात ) के सोलकी राजा मूलराज द्वारा नष्ट होते हुए धरणीवराह को आश्रय दिया था। यह धरणीवराह शायद .मारवाड़ का पड़िहार (प्रतिहार ) राजा था । वि. सं. १०५३ ( ई. स. १९७) का उपर्युक्त लेख इसी धवल के समय का है। इस ( धवल ) ने, अपनी वृद्धावस्था के कारण, उक्त संवत् के आसपास राज्य का भार अपने पुत्र बालप्रसाद को सौंप दिया था । इसकी राजधानी हस्तिकुंडी ( हथूडी ) थी। इसके बाद की इस वंश की कोई प्रशस्ति न मिलने से इस शाखा का अगला हाल नहीं मिलता है । (1) जर्नल बंगाल एशियाटिक सोसाइटी, भाग ६२, ( हिस्सा १)पृ. ३१४ (२) सम्भवतः इस धवल की या इसके पिता की बहन महालक्ष्मी का विवाह मेवाड़ नरेश भर्तृभट्ट द्वितीय से हुआ था । मेवाड़ नरेश अल्लट उसीका पुत्र था । (३) धवल ने अपने दादा विदग्धराज के बनवाये जैनमन्दिर का जीर्णोद्धार कर उसमें ऋषभनाथ की मूर्ति प्रतिष्ठित की थी। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034595
Book TitleRashtrakuto (Rathodo) Ka Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVishweshwarnath Reu
PublisherArchealogical Department Jodhpur
Publication Year1934
Total Pages182
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size27 MB
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