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________________ राजस्थान ( राजपूताना) के पहले राष्ट्रकूट । हस्तिकुंडी (हथूडी) की शाखा। [वि. सं. १५० ( ई. स. ८१३ ) के निकट से वि. सं. १०५३ ( ई. स. १९६ ) के निकट तक ] कन्नौज के गाहड़वाल राजा जयचंद के वंशजों के राजपूताने में आने से पहले मी हस्तिकुंडी (हथूडी-जोधपुर राज्य ), और धनोप ( शाहपुरा राज्य) में राष्ट्रकूटों के राज्य रहने के प्रमाण मिलते हैं। बीजापुर से, वि. सं. १०५३ (ई. स. १९७) का, एक लेखं मिला है। ( यह स्थान जोधपुर राज्य के गोडवाड़ परगने में है ।) इसमें हथूडी के राठोड़ों की वंशावली इसप्रकार लिखी है: १ हरिवर्मा उक्त लेख में सब से पहला नाम यही है । २ विदग्घराज यह हरिवर्मा का पुत्र था, और वि. सं. १७३ (ई. स. ११६ ) में विधमान यो। (1) जर्नल बंगाल एशियाटिक सोसाइटी, भाग ६२, (हिस्सा 1). " (२) जर्नल बंगाल एशियाटिक सोसाइटी, भाग ६२, (हिस्सा 1) ३१४ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034595
Book TitleRashtrakuto (Rathodo) Ka Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVishweshwarnath Reu
PublisherArchealogical Department Jodhpur
Publication Year1934
Total Pages182
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size27 MB
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