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________________ राष्ट्रकूटों का इतिहास लाट (गुजरात) के राष्ट्रकूटों का नक्शा सख्या नाम परस्पर का सम्बन्ध ज्ञात समय (प्रथम शाखा) | कर्कराज प्रथम २ ध्रुवराज नं. १ का पुत्र ३ गोविन्दराज नं.२ का पुत्र नागवर्मा ४ कर्कराज द्वितीय महाराजा- नं. ३ का पुत्र श. सं. ६७६ राष्ट्रकूट दन्तिवर्मा धिराज (दन्तिदुर्ग) द्वितीय, और राष्ट्रकूट कृष्णराज प्रथम (द्वितीय शाखा) | इन्द्रराज मान्यखेट के राष्ट्रकूट गोविराजा गोवि न्दराज तृतीय न्दराज तृतीयका | छोटा भाई २ कर्कराज | महासाम- नं. १ का पुत्र श.सं. ७३४, राष्ट्रकूट अमोघ|न्ताधिपति ७३८और ७४६| वर्ष प्रथम ३ । गोविन्दराज , नं.२ का भाई | श सं.७३५, राष्ट्रकूट अमोध और 9४६ | वर्ष प्रथम | ध्रुवराज प्रथम , नं.२ का पुत्र श.सं. ७५७ राष्ट्रकूट प्रमोघ वर्ष प्रथम ५ अकालवर्ष नं.४ का पुत्र राष्ट्रकूट अमोघ वर्ष प्रथम ६ ध्रुवराज द्वितीय , नं. ५ का पुत्र श.सं.७८६ मिहिर (प्रतिहार भोज) | दन्तिवर्मा नं. ६ का भाई| श. सं. ७८६ ८ | कृष्णराज नं. ७ का पुत्र श.सं.८१० राष्ट्रकूट कृष्ण राज द्वितीय Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034595
Book TitleRashtrakuto (Rathodo) Ka Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVishweshwarnath Reu
PublisherArchealogical Department Jodhpur
Publication Year1934
Total Pages182
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size27 MB
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