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________________ अहिंसा - अणुव्रत ३७ उसमें भोजनार्थ सम्मिलित न हो । जो अणुव्रती अपने घर में सर्वेसर्वा है- - सब कार्यों में उसका आदेश चलता है वह घरवालोंका नाम लेकर अनुत्तरदायी नहीं हो सकता अर्थात् उसके यहाँ यदि वृहत् जीमनवार होगा तो उसका उत्तरदायी वही माना जायेगा । यदि ऐसी स्थिति हो कि अन्य विषयोंमें उसके आदेश मान्य होते हों पर इस विषय में छोटे भाई व अन्य पारिवारिक आग्रहपूर्वक वृहत् जीमनवार करते हों तो बह उत्तरदायी नहीं बशर्ते कि वह तत्सम्बन्धी किसी कार्य-क्रम में भाग न ले अर्थात् यदि जीमनवार विवाह के सम्बन्धसे है तो वह विवाह सम्बन्धी किसी कार्य में भाग न ले । जैसे कि बहुत से लोग राज्य - दण्डसे बचनेके लिये एक बड़े जीमनवारके स्थानपर दो चार जीमनवार नियमानुसार कर देते हैं वैसे अणुती नहीं कर सकेगा । स्वाभाविक रूपसे उसे दो या चार जीमनवार करने पड़ रहे हैं वह दूसरी बात है । नियम के अनुसार जीमनवारकी आयोजना जिसनेकी है और तदनुसार ही न्यौते दिये हैं उस जीमनवारमें यदि २-४ व्यक्ति अनायास अधिक हो जाते हैं तो उससे नियम भंग नहीं माना जायेगा । टी- पार्टी और ऐट होम जीमनवार नहीं माने गये हैं । पाहुनोंके लिये की गई भोजन-व्यवस्था जीमनवार नहीं मानी गई है बशर्ते कि पाहुने जीमनवारके उपलक्ष में ही न आये हों । बाप दादेके परिवारका सम्बन्ध जीमनवार करने वालेके बाप दादेसे समझना चाहिये । जहाँ जीमनवार करनेवाली घरकी मुखिया स्त्री है वहाँ बाप दादेका अर्थ उसके श्वसुर व दादे श्वसुरसे समझना चाहिये । दादेके परिवारका अर्थ दादे तक व उसके पुत्र पुत्रियों तक ही है न कि उसके ( दादेके ) भाई बहिनों तक । ७ - नियम निषिद्ध जीमनवारमें भोजनार्थ सम्मिलित न होना । जो राजकीय नियमोंसे निषिद्ध है व वृहत् जीमनवारकी परिभाषा Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034471
Book TitleAnuvrat Drushti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNagraj Muni
PublisherAnuvrati Samiti
Publication Year1954
Total Pages142
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
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