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________________ १४ अणुव्रत-दृष्टि ___ सिनेमा, नाटक आदि भी, जिनमें बहुधा वेश्या-नृत्यका भी स्थान रहता है, देखने जाना अनन्तरोक्त स्पष्टीकरणके अन्तर्गत आ जाता है । १२-किसी स्त्रीको फुसलाकर, धमकाकर, बहकाकर या लुभाकर उसके साथ विवाह न करना। अणुव्रतीको अविवाहित रहना स्वीकार होगा परन्तु तत्प्रकारके अवैध उपायोंसे वह विवाह करनेका प्रयत्न न करेगा। ___ नोट-ऊपर बताये गये महिलाओंके नियम पुरुषों पर व पुरुषों के महिलाओं पर लागू होते हैं। चरित्रका सम्बन्ध त्रियों और पुरुषोंसे समानतया है। नियम कुछ स्त्रियोंको विशेष लक्ष्य करते हुए और कुछ पुरुषोंको विशेष लक्ष्य करते हुए बनाये गये हैं। जिस प्रवृत्तिका जिससे ज्यादा सम्बन्ध था वह नियम उसी वर्गको लक्ष्य करनेवाला हो यह स्वाभाविक था। तत्त्वतः यह नोट स्पष्ट करता ही है, एक पक्षकी ओर संकेत करनेवाले नियम भी समानतया उभय पक्ष पर लागू हैं। उदाहणार्थ- 'वेश्या व पर-स्त्रीगमन न करना' यह शब्द-रचनासे पुरुषोंके लिये विधायक है किन्तु तत्त्वतः अणुव्रतिनी महिलाओंके लिये भी पर-पुरुषगमनका निषेध करता है। 'अकेले परपुरुषके साथ न घूमना, न खेलना, न सिनेमा आदि देखने जाना'-यह शब्द-रचना त्रियोंके लिये विधायक है किन्तु तात्पर्य, दृष्टि और भाव अणुव्रती पुरुषोंके लिये भी अकेली पर-स्त्रीके साथ घूमने, फिरने व सिनेमा आदि देखनेका निषेध करते हैं। इसी तरह सभी नियमोंका व्यावहारिक भाव समझ लेना चाहिये । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034471
Book TitleAnuvrat Drushti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNagraj Muni
PublisherAnuvrati Samiti
Publication Year1954
Total Pages142
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
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