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________________ भावार्थ-इस वृत्तिसे लघुता होती है. लोलुपता बढती है. (१५), गृहस्थोंके वहां भिक्षा निमित्त जाते है. वहां तीन घरसे ज्यादा सामने लाके देते हुवे अशनादिको ग्रहन करे.३ ____ भावार्थ-दृष्टिसे विगर देखी हुइ वस्तु तो मुनि ग्रहण कर ही नहीं सकते है, परन्तु कितनेक लोक चोका रखते है, और कोह देशोंमें ऐसी भी भाषा है कि-यह भातपाणीका घर, यह बैठनेका घर, यह जीमनेका घर-ऐसे संज्ञा वाची घरोंसे तीन घरसे उप. रांत सामने लाके देवे, उसे साधु ग्रहन करे. ३ (१६), अपने पावोंको (शोभानिमित्त) प्रमार्जे, अच्छा साफ करे. ३ (१७) अपने पावोंको दबावे, चंपावे. ( १८ ) ,, तैल, घृत, मक्खन, चरबीसे मालिस करावे. ३ (१९) लोद्र कोकणादि सुगन्धि द्रव्यसे लिप्त करे. ( २०) एवं शीतल पाणी, गरम पाणीसे एकवार, वारवार धोवे.३ ( २१ ) ,, अलतादिक रंगसे पावोंको रंगे. ३ भावार्थ-विगर कारण शोभा निमित्त उक्त कार्य स्वयं करे, अनेरोंसे करावे, करते हुवेको अच्छा समझे, अथवा सहायता देवे, वह साधु दंडका भागी होता है. इसी माफिक छे सूत्र ( अलापक) काया ( शरीर ) आश्रि. त भी समझना, और इसी माफिक छे सूत्र, शरीरमें गडगुम्बड आदि होनेपर भी समझना. ३३ (३४) ,, अपने शरीरमें मेद, फुनसी, गडगुम्बड, जलंधर, हरस, मसा आदि होनेपर तीक्षण अनसे छेदे, तोडे, काटे. ३
SR No.034235
Book TitleShighra Bodh Part 21 To 25
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar
PublisherSukhsagar Gyan Pracharak Sabha
Publication Year
Total Pages419
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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