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________________ (४३) १४३०४ चरम उदेशो १४३०४ अचरम उदेशो , इस मोघ समुच्चय) शतकके ग्यारा उदेशाके सर्व मांगा १००१२८ होते है इसी माफीक १००१२८ कृष्णलेशी शतकके ११ उदेशा १००१२८ निललेशी शतकके ११ उदेशा १००१२८ कापोतलेशी शतकके ११ उदेशा १००१२८ समुच्चय मन्य संबन्धी ११ उदेशा १०.१२८ मव्य कृष्णलेशी शतक उदेशा ११ १०.१२८ भव्य निललेशी , , , १००१२८ मव्य कापोतलेशी , , , अमय जीवोंका मी लेश्या संयुक्त च्या शतक है परन्तु अमन्यमें चरम अचरम उदेशोंकों छोड शेष प्रत्येक शतकके नौ नौ उदेशा कहना । जिस्मे च्यार उदेशा तो अनान्तर समयके होनेसे मांगा नहीं होते है शेष पांच उद्देशावोंके प्रत्येक उदेशे १४३०१ भागोंके हीसारसे ७१५२० मागे एक शतक के होते है एवं पार शतकके २८६०८० भांगे होते है। पहलेके आठ शतकके ८०१०२४ मागा मीलानेसे १०८७१०१ मागा श्रेणिशतकके होते है। इति चौतीसवां मूल शतक के बारहा अन्तर शतकका १२१ उदेशा। . . सेवं भंते सेवं भंते तमेवसचम् । समाप्तं चौतीसवा शतक ।
SR No.034235
Book TitleShighra Bodh Part 21 To 25
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar
PublisherSukhsagar Gyan Pracharak Sabha
Publication Year
Total Pages419
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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