SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 283
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ම ම ම ම ම "EEEEEE (७०) अधिक । एवं शेष आठ गमा मी लगा लेना. यावत बारहवां देवलोक तक परन्तु स्थिति स्व स्व स्थानसे कहना, गमा नौ, मव ज० तीन भव उ० सात मव । बारहवा दे० और मनुष्य ।। (१) गमें ज० प्रत्येक वर्ष २१ सागरो० उ०६६ सा० कोड " उ०६३ सा० ४ प्रत्येवर्ष , उ०६१ सा. ४ कोड. (१) गमें म. , , उ०, " म. , . , उ०६६ सा० ४ प्रत्ये. ज० " , उ०६६ सा० ४ कोड (७) गमें ज० कोडपर्व २२ मा० उ०, . " (८) गमें न० , उ०१५ सा० ४ प्रत्ये० (९) गर्भ म० , .,. उ०१६ सा० ४ कोट० .... एवं नौग्रीवैग परन्तु प्रथमके दो संहननवाला भावे । गमा नौग्रावगकि स्थितिसे लगा लेना। विनयवेमानमें संख्याते वर्षवाला संज्ञी मनुष्य उत्पन्न होते । वह ज० ३१ सागरोपम उ० ३५ सागरोपमकि स्थितिमें उत्पन्न होते है । ऋद्धि पूर्ववत् परन्तु संहनन एक प्रथमवाला, दृष्टी एक सम्यग्दष्टी, ज्ञानी ज्ञानवाला शेष पूर्ववत् । भव न० ३ ३० ५ मय गमा नौ। (१) गमें प्रत्येवर्ष ३१ मा० उ०६६ सा० ३ कोडपूर्व (२) गमें , , . उ०६२ सा० ३ प्रत्ये० (३) गमें , उ०६६ सा० ३ कोड (१) गर्म , . , ... उ०१९. " ...
SR No.034235
Book TitleShighra Bodh Part 21 To 25
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar
PublisherSukhsagar Gyan Pracharak Sabha
Publication Year
Total Pages419
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy