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________________ (१३) इन्द्रिय एक स्पर्श. (११) समुद्धात-तीन वेदवित कवाय• मरणन्तिक । (१५) वेदना-साता असाता (१२) वेद एक नपुंसकबाम (१७) स्थिति न० अन्तर महुर्त. उ० २२००० वर्षवाला (१८) अध्यवसाय, असंख्याते, प्रसस्थ, अप्रसस्य ।। (१९) अनुबन्ध-ज० अन्तर महुर्त. उ० १२०००वर्षवाला (२०) संभहो-भवापेक्षा ज. दोयभव उ० असंख्याते भवा कालापेक्षा ज० दोय अन्तर महुर्त. उ० असंख्याते काल। इतना काल गमनागमन करे । और नौगमा निचे प्रमाणे । (१) मोघसे ओघ-भव ज. दोय उ० असंख्याता. काल न० दोय अन्तर महुर्त. उ० असंख्याता काल । (२) ओघसे न० ज० दोयभव उ० मसंख्याते भव. काल ज० दोय अन्तरमहुर्त उ० असंख्याते काल । (३) ओघसे उ० । भव भ० दोय उ० आठ भव करे. काल ज० अन्तरमहुर्त और २२००० वर्ष. उ० १७६००० वर्ष । (४) ज०से ओघ ० पहेला गमा साढश परन्तु लेश्या तीन स्थिति और अनुबन्ध अन्तरमहुर्त अध्यवसाय अप्रसस्थ। (१) जसे जघन्य, चोथा गमाकी माफीक । () न०से उत्कृष्ट-पांचमा गमा माफीक परन्तु भव ज० दोय. उ० आठ भव करे काल न० अन्तर महुर्त और १२००० वर्ष उ० च्यार. मन्तर महुर्त उ० ८८००० वर्ष । (७) उसे ओघ-तीमा गमा माफीक यहांपर स्थिति. ज. उ० २२००० वर्षकि ।
SR No.034235
Book TitleShighra Bodh Part 21 To 25
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar
PublisherSukhsagar Gyan Pracharak Sabha
Publication Year
Total Pages419
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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