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________________ भोपसे ओघ०२२ सागरो दोय अन्तर०३०६९ सा यार कोडपूर्व, मोधसे ज०२२ सा दोय अन्तर० उ०६६ सा च्यार अन्तर० मोघसे उ० १३ सा. दोष अन्तर० उ०६६ मा० ३ कोडपूर्व न० ओघ० २२ सा. दोय अन्तर० उ० ६६ सा० च्यार को ज० ज . .." " च्यार अन्तर ज० उ० . , , .. तीन कोडपर्व उ० मोघ ३३ सा दोय कोहपूर्व , च्यार कोडपूर्व ३० ज० , , . , च्यार अन्तर० उ० उ. , , , तीन कोड पूर्व नाणन्ता उ० गमाती न नाणता दो दोय स्थिति न० कोडपूर्व । भनुबन्ध आयुष्य कि माफीक । संज्ञी मनुष्य संख्याते वर्षवाले मरके रत्नप्रभा नरकमें जावे सो यहांसे जघन्य प्रत्यक्रमास उ० कोडपूर्व वहांपर ज० दश हजार वर्ष उ० एक सागरोपमकि स्थितिमें उत्पन्न होते है । ऋद्धि जेसे। . (१) उत्पात-संख्याते वर्षवाला संज्ञो मनुष्यसे । (२) परिमाण-एक समयमे १-२-३ उ० संख्याते । (३) संहनन-छे वों संहननवाला। (४) अवगाहाना ज० प्रत्यक अंगुल उ० ५०० धनुष्यवाला। (१) ज्ञान-च्यार ज्ञान तीन अज्ञानकि मनना (भवापेक्षा)। (६) समुद्घात, केवली समु० वर्जके छे समु० वाला । )७) स्थिति-न प्रत्यकमास उ० कोडपूर्व । (८) मनुबंध ज०..प्रत्यकमात उ० कोडपूर्व। .
SR No.034235
Book TitleShighra Bodh Part 21 To 25
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar
PublisherSukhsagar Gyan Pracharak Sabha
Publication Year
Total Pages419
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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